Home » Religions in India » रादौर शिव मंदिर, यमुनानगर, हरियाणा
radaur-shiv-mandir-yamunanagar-haryana

रादौर शिव मंदिर, यमुनानगर, हरियाणा

रादौर शिव मंदिर में विद्यमान है शिव पार्वती विवाह का साक्ष्य, उत्तराखंड के त्रियुगी नारायण मंदिर से लाई गई थी शिव धूने के लिए अग्रि, शिव पार्वती विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है महाशिवरात्रि का पर्व महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में हर्षोल्लास व श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। देश के सभी शिवमंदिरों में इस दिन शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं लेकिन रादौर के प्राचीन शिव मंदिर अंधेरिया बाग में मनाए जाने वाले महाशिवरात्रि पर्व की अपनी ही मान्यता है।

मान्यता शिव पार्वती के विवाह से जुड़ी हुई है। यहां के शिव मंदिर में स्थापित शिव धूने की अग्रि को उत्तराखंड के प्राचीन स्थल त्रियुगी नारायण मंदिर से लाया गया था। यह वह प्राचीन स्थल है जहां पर शिव पार्वती का विवाह श्री नारायण की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ था और तभी से उस स्थान पर विवाह की अग्रि आज भी प्रज्जवलित है।

मंदिर के पुजारी महंत यमुनागिरि शास्त्री के अनुसार मंदिर में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, जो कितने वर्ष पुराना है इसका कोई प्रमुख प्रमाण किसी के पास नहीं है। लेकिन मंदिर के बारे में ऐसी किदवंती है कि महाभारत युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण के साथ अर्जुन यहां स्थापित शिवलिंग पर पूजा अर्चना करने आए थे। उस समय यहां पर घने जंगल व बाग हुआ करते थे और यही कारण है कि बाद में इस पवित्र भूमि को प्राचीन शिव मंदिर अंधेरिया बाग का नाम दिया गया। आज मंदिर भवन भक्ति व सुदंरता का केन्द्र बना हुआ है

इस मंदिर में वर्ष में तीन मुख्य आयोजन होते हैं। पहला महाशिवरात्रि के मौके पर। महाशिवरात्रि के महत्व के बारे बताते हुए उन्होनें कहा कि इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती का विवाह सम्पन्न हुआ था। यह पर्व फाल्गुन मास की चौदस का मनाया जाता है। इस पर्व का विशेष महत्व है और लोग श्रद्धा व विश्वास के साथ इस दिन भगवान शिव की आराधना करते है। इस दिन मंदिर में भी विशेष पूजन का आयोजन किया जाता है। जिसके तहत रात्रि जागरण, हवन, रूद्राभिषेक व चार पहर की पूजा की जाती है। दूसरा आयोजन जन्माष्टमी व तीसरा गोवर्धन पूजा के दिन होता है।

Check Also

Maha Shivaratri Fast: Hindu Culture & Traditions

Maha Shivaratri Fast: Hindu Culture & Traditions

Maha Shivaratri is the wonderful opportunity for the followers of Lord Shiva, to praise the …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *