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महर्षि वेदव्यास मंदिर, रोहतांग दर्रा, कुल्लू, हिमाचल प्रदेश

शायद ही आपको ये पता होगा कि महर्षि वेदव्यास ने दुनिया का पहला ग्रंथ इसी स्‍थान पर लिखा था। यहां आज भी उनका मंदिर है और लोग उनकी पूजा करते हैं। दरअसल यह पवित्र स्‍थान देव भूमि हिमाचल के कुल्लू जिले में हैं।

आपको बतां दें कि यहां पर रोहतांग दर्रे में अपुन नामक स्‍थान पर महर्षि वेदव्यास जी का मंदिर है। कहा जाता है कि यहां पर ही महर्षि वेदव्यास ने संसार की प्रथम पुस्तक ‘वेद की रचना की थी। वेद व्यास महान ऋषि थे जिन्होंने वेदों को चार भागों में बांटा था। इतना ही नहीं यहां पर ही वेदव्यास ने महाभारत की रचना ही नहीं कि बल्कि उसके हर एक अंश को खुद अनुभव भी किया है। वेद व्यास का पूरा नाम कृष्णद्वैपायन है।

जानकारी के मुताबिक पौराणिक महाकथाओं में जिन विशाल पर्वतों भृगतुंग, इंद्रासन और देव टिब्बा का उल्लेख आया है, वे सभी यहीं पर स्थित हैं। दरअसल रोहतांग दर्रा हर वर्ष मई व जून महीने में आवाजाही के लिए खुलता है। अक्तूबर-नवंबर तक यहां सैलानियों की खूब रौनक रहती है। इस स्‍थान से ऊंचे पर्वतों का विहंगम नजारा देखने को मिलता है। महर्षि व्यास के नाम से ही इस नदी का नाम ब्यास पड़ा है। इससे पहले नदी का नाम अर्जिकुजा व विपाशा माना जाता है।

महर्षि वेदव्यास मंदिर में आज भी सैलानी आकर खुद को धन्य मानते हैं और दिव्य कुंड का पानी पीकर कृताथ होते हैं। लोग इस पानी की अमृत मान कर पीते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सैलानियों को पहले मशहूर पर्यटन स्‍थल मनाली और यहां से वाहन के माध्यम से 52 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद रोहतांग पहुंचना होता है।

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