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द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका, गुजरात

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका, गुजरात

गुजरात के पश्चिम में स्थित है जगत मंदिर यानि द्वारकाधीश मंदिर। जो लगभग 2,500 साल पुराना है।  भगवान कृष्ण के जीवन से सम्बन्ध होने के कारण इसका विशेष महत्व है। 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारका नगरी बसाई थी। यह स्थान यादवों की राजधानी थी। श्री कृष्ण के अन्तर्धान होने के पश्चात प्राचीन द्वारकापुरी समुद्र में डूब गई। केवल भगवान का मन्दिर समुद्र ने नहीं डुबाया।

जहां श्रीकृष्ण का महल था उसी स्थान पर द्वारकाधीश मंदिर स्थित है। आदि शंकराचार्य जी द्वारा निर्मित देश के चार धामों में से द्वारका नगरी भी एक है। द्वारका नगरी को सप्तपुरियों में भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि यहां पर मूल मंदिर श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ जी ने बनवाया था।

अक्ररूर जी कंस के विवश करने पर श्री कृष्ण और बलराम जी को नंद गांव से मथुरा लेकर आए थे। दोनों भाईयों ने मथुरा आकर बहुत से राक्षसों का सर्वनाश किया। जब कंस को सभी तरफ से हताशा और निराशा झेलनी पड़ी तो वह स्वयं मैदान में उतरा कंस और श्री कृष्ण में युद्ध हुआ। श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और अपने माता- पिता तथा नाना को बंधी ग्रह से मुक्त करवाया।

कंस के मरणोपरांत अग्रसेन जी ने पुन: मथुरा की भागदौड़ संभाली। जरासंघ कंस का ससुर था। अपने जमाई की मृत्यु का बदला लेने के लिए जरासंघ ने मथुरा पर 18 बार आक्रमण किया। अंतत: बार-बार मथुरा वासियों को हानि न हो श्रीकृष्ण ने अपने सजातियों को मथुरा छोड़ देने पर राजी कर लिया। वे सब मथुरा छोड़कर रैवत पर्वत के समीप कुशस्थली पुरी (द्वारिका) में जाकर बस गए। श्री कृष्ण जगत भलाई के लिए रण छोड़ कर भागे थे इसलिए उन्हें यहां ‘रणछोड़ जी’ भी कहा जाता है।

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