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वीर सिपाही – श्याम नारायण पाण्डेय

Maharana Pratapभारत-जननी का मान किया,
बलिवेदी पर बलिदान किया
अपना पूरा अरमान किया,
अपने को भी कुर्बान किया

रक्खी गर्दन तलवारों पर
थे कूद पड़े अंगारों पर,
उर ताने शर-बौछारों पर
धाये बरछी की धारों पर

झनझन करते हथियारों में
अरि-नागों की फुफकारों में
जंगीगंज-प्रबल कतारों में
घुस गये स्वर्ग के द्वारों में

उनमें कुछ ऐसी आन रही,
कुछ पुश्तैनी यह बान रही
मेवाड़-देश के लिए सदा
वीरों की सस्ती जान रही

Maharana Pratap Mewarकहते थे भला आने दो
चिल्ले पर तीर चढाने दो
आग को पैर बढ़ाने दो
रन में घोड़ा दौड़ाने दो

देखो फिर कुंतल बालों की,
कुछ करामात करवालों की
इस वीर-प्रसवनी अवनी के
छोटे से छोटे बालों की

बसने तक को है ग्राम नहीं,
जंगल में रहते धाम नहीं
पर भीषण यही प्रतिज्ञा है,
अरि कर सकते आराम नहीं

हम माता के गन गायेंगे
बलि जन्म-भूमि पर जायेंगे
अपना झंडा फहराएंगे
हम हाहाकार मचायेंगे

∼ श्याम नारायण पाण्डेय

About Shyam Narayan Pandey

Shyam Narayan Pandey (1907 - 1991) was an Indian poet. He was born on Shravan Krishna Panchami of Vikram Samvat 1964 (i.e. 1907 CE) in the Dumraon village of Mau (then Azamgarh) district of Uttar Pradesh (India). He got primary education in his village and nearby town, after which moved to Kashi for higher studies in Sanskrit. He attained the degree of Sahityacharya in HIndi from Kashi Vidya Peeth. He died at his ancestral home in Dumraon in 1991. His works include the epic poem Haldighati, which is based on the Battle of Haldighati between the forces of Akbar and Maharana Pratap. Pandey's another epic Jauhar, depicting the self-sacrifice of Rani Padmini, a queen of Chittor, written in a folk style became very popular in the decade of 1940-50.

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