Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » उठो लाल अब आँखें खोलो – सोहनलाल द्विवेदी

उठो लाल अब आँखें खोलो – सोहनलाल द्विवेदी

उठो लाल अब आँखें खोलो,
पानी लायी हूँ मुंह धो लो।

बीती रात कमल दल फूले,
उसके ऊपर भँवरे झूले।

चिड़िया चहक उठी पेड़ों पे,
बहने लगी हवा अति सुंदर।

नभ में प्यारी लाली छाई,
धरती ने प्यारी छवि पाई।

भोर हुई सूरज उग आया,
जल में पड़ी सुनहरी छाया।

नन्ही नन्ही किरणें आई,
फूल खिले कलियाँ मुस्काई।

इतना सुंदर समय मत खोओ,
मेरे प्यारे अब मत सोओ।

— सोहनलाल द्विवेदी

About Sohanlal Dwivedi

सोहन लाल द्विवेदी (22 फ़रवरी 1906 - 1 मार्च 1988) हिन्दी के प्रसिद्ध कवि हैं। द्विवेदी जी हिन्दी के राष्ट्रीय कवि के रूप में प्रतिष्ठित हुए। ऊर्जा और चेतना से भरपूर रचनाओं के इस रचयिता को राष्ट्रकवि की उपाधि से अलंकृत किया गया। महात्मा गांधी के दर्शन से प्रभावित, द्विवेदी जी ने बालोपयोगी रचनाएँ भी लिखीं। 1969 में भारत सरकार ने आपको पद्दश्री उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया था।

Check Also

काम हमारे बड़े–बड़े: प्रेरणादायक बाल-कविता

काम हमारे बड़े–बड़े: प्रेरणादायक बाल-कविता

हम बच्चे हैं छोटे–छोटे, काम हमारे बड़े–बड़े। आसमान का चाँद हमी ने थाली बीच उतारा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *