Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » स्नेह निर्झर बह गया है – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

स्नेह निर्झर बह गया है,
रेत सा तन रह गया है।

आग की यह डाल जो सूखी दिखी‚
कह रही है – अब यहां पिक या शिखी‚
नहीं आते पंक्ति मैं वह हूं लिखी‚
नहीं जिसका अर्थ–
जीवन दह गया है।

दिये हैं मैंने जगत को फूल–फल‚
किया है अपनी प्रभा से चकित चल‚
पर अनश्वर था सकल पल्लवित पल‚
ठाट जीवन का वही–
जो ढह गया है।

अब नही आती पुलिन पर प्रियतमा‚
श्याम तृण पर बैठने को निरुपमा‚
बह रही है हृदय पर केवल अमाऌ
मैं अलक्षित हूं‚ यही
कवि कह गया है।

स्नेह निर्झर बह गया है‚
रेत सा तन रह गया है।

∼ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

शब्दार्थः
निर्झर ∼ झरना
पिक ∼ कोयल
शिखी ∼ मोर
अनश्वर ∼ अविनाशी
दह गया ∼ जल गया
पल्लवित ∼ हरा भरा
पुलिन ∼ नदी किनारे की घास
अमा ∼ अमवस्या

About Suryakant Tripathi Nirala

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ (11 फरवरी 1896 – 15 अक्टूबर 1961) हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं। काव्यसंग्रह– जूही की कली कविता की रचना 1916 में की गई। अनामिका 1923, परिमल 1930, गीतिका 1936, द्वितीय अनामिका 1938 अनामिका के दूसरे भाग में सरोज सम़ृति और राम की शक्ति पूजा जैसे प्रसिद्ध कविताओं का संकलन है। तुलसीदास 1938, कुकुरमुत्ता 1942, अणिमा 1943, बेला 1946, नये पत्ते 1946, अर्चना 1950, आराधना 1953, गीत कुंज 1954, सांध्यकाकली, अपरा। उपन्यास– अप्सरा, अलका, प्रभावती 1946, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा। कहानी संग्रह– लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी-1941, सखी, देवी। निबंध– रवीन्द्र कविता कानन, प्रबंध पद्म, प्रबंध प्रतिमा, चाबुक, चयन, संग्रह। पुराण कथा– महाभारत अनुवाद– आनंद मठ, विष वृक्ष, कृष्णकांत का वसीयतनामा, कपालकुंडला, दुर्गेश नन्दिनी, राज सिंह, राजरानी, देवी चौधरानी, युगलांगुल्य, चन्द्रशेखर, रजनी, श्री रामकृष्ण वचनामृत, भरत में विवेकानंद तथा राजयोग का बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद

Check Also

Longest Love Poem

Longest Love Poem

Banská Štiavnica, Slovakia – April 23, 2017 – “Marína” is a great work of a …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *