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बचपन - वंश - Short Hindi Poetry about Childhood

बचपन – वंश – Short Hindi Poetry about Childhood

छीनकर खिलौनों को बाँट दिए ग़म,
बचपन से दूर, बहुत दूर हुए हम।
अच्छी तरह से अभी पढ़ना न आया,
कपड़ो को अपने बदलना न आया।

लाद दिये बस्ते भारी-भरकम,
बचपन से दूर-दूर हुए हम।
अंग्रेजी शब्दों को पढ़ना-पढ़ाना,
घर आके दिया हुआ, काम निबटाना।

होमवर्क करने से फूल जाए दम,
बचपन से बहुत-बहुत दूर हुए हम।
देकर के थपकी, न माँ मुझे सुलाती,
दादी है अब नहीं, कहानियाँ सुनती।

बिलख रही कैद बनी, जीवन सरगम।
बचपन से बहुत दूर-दूर हुए हम।

~ वंश (एल.के.जी.) St. Gregorios School, Sector 11, Dwarka, New Delhi – 110075

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