Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » शिकायत – राम अवतार त्यागी

शिकायत – राम अवतार त्यागी

आँसुओ तुम भी पराई
आँख में रहने लगे हो
अब तुम्हें मेरे नयन
इतने बुरे लगने लगे हैं।

बेवफाई और मेरे सामने ही
यह कहाँ की दोस्ती है ?
जिंदगी ताने सुनाती है कभी
मुझको जवानी कोसती है।

कंटको तुम भी विरोधी
पाँव में रहने लगे हो
अब तुम्हें मेरे चरण
इतने बुरे लगने लगे हैं।

साथ बचपन से रहे थे हम सदा
साथ ही दोनों पढ़े थे
घाटियों में साथ घूमे और हम
साथ पर्वत पर चढ़े थे।

दर्द तुम भी दूसरों के
काव्य में रहने लगे हो
अब तुम्हें मेरे भजन
इतने बुरे लगने लगे हैं।

∼ राम अवतार त्यागी

About Ram Avatar Tyagi

राम अवतार त्यागी (जन्म: 17 मार्च 1925 – निधन: 12 अप्रैल 1985) पीड़ा के कवि हैं। इनकी शब्द-योजना सरल तथा अनुभूति गहरी है। ‘नया ख़ून’ तथा ‘आठवां स्वर’ इनके कविता संग्रह हैं। ‘आठवां स्वर’ पुस्तक पुरस्कृत है। राम अवतार त्यागी का जन्म मार्च 1925 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले के संभल तहसील के कुरकावली ग्राम में ब्राह्मण परिवार में हुआ। घर की रूढिवादिता से विद्रोह कर त्यागी ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की। अंत में दिल्ली आकर इन्होंने वियोगी हरि और महावीर अधिकारी के साथ सम्पादन कार्य किया। राम अवतार त्यागी जी दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण करने वाले एक ऐसे हस्ताक्षर थे जिन्होंने हिन्दी गीत को एक नया मुक़ाम दिया। आपके गीतों के विषय में बालस्वरूप राही जी कहते हैं कि त्यागी की बदनसीबी यह है कि दर्द उसके साथ लगा रहा है, उसकी ख़ुशनसीबी यह है कि दर्द को गीत बनाने की कला में वह माहिर है। गीत को जितनी शिद्दत से उसने लिया है, वह स्वयं में एक मिसाल है। आधुनिक गीत साहित्य का इतिहास उसके गीतों की विस्तारपूर्वक चर्चा के बिना लिखा ही नहीं जा सकता। रामधारी सिंह दिनकर आपके गीतों पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि त्यागी के गीतों में यह प्रमाण मौजूद है कि हिन्दी के नए गीत अपने साथ नई भाषा, नए मुहावरे, नई भंगिमा और नई विच्छिति ला रहे हैं। त्यागी के गीत मुझे बहुत पसन्द आते हैं। उसके रोने, उसके हँसने, उसके बिदकने और चिढ़ने, यहाँ तक कि उसके गर्व में भी एक अदा है जो मन मोह लेती है। ‘नया ख़ून’; ‘मैं दिल्ली हूँ’; ‘आठवाँ स्वर’; ‘गीत सप्तक-इक्कीस गीत’; ‘गुलाब और बबूल वन’; ‘राष्ट्रीय एकता की कहानी’ और ‘महाकवि कालिदास रचित मेघदूत का काव्यानुवाद’ जैसे अनेक काव्य संकलनों के साथ ही साथ ‘समाधान’ नामक उपन्यास; ‘चरित्रहीन के पत्र’; ‘दिल्ली जो एक शहर था’ और ‘राम झरोखा’ जैसी गद्य रचनाएँ भी आपके रचनाकर्म में शामिल हैं। अनेक महत्तवपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं का आपने जीवन भर सम्पादन किया। हिन्दी फिल्म ‘ज़िन्दगी और तूफ़ान’ में मुकेश द्वारा गाया गया आपका गीत ‘ज़िन्दगी और बता तेरा इरादा क्या है’ ख़ासा लोकप्रिय हुआ। आपके गीत संवेदी समाज के बेहद एकाकी पलों के साथी हैं। 12 अप्रेल सन् 1985 को आप अपने गीत हमारे बीच छोड़कर हमसे विदा ले गए।

Check Also

जलियाँवाला बाग में बसंत - सुभद्रा कुमारी चौहान

जलियाँवाला बाग में बसंत – सुभद्रा कुमारी चौहान

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *