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सभा का खेल – सुभद्रा कुमारी चौहान

Sabha Ka Khel - Subhadra Kumari Chauhanसभा सभा का खेल आज हम,
खेलेंगे जीजी आओ।
मैं गांधी जी छोटे नेहरू,
तुम सरोजिनी बन जाओ॥

मेरा तो सब काम लंगोटी,
गमछे से चल जायेगा।
छोटे भी खद्दर का कुर्ता,
पेटी से ले आयेगा॥

लेकिन जीजी तुम्हें चाहिये,
एक बहुत बढ़िया सारी।
वह तुम मां से ही ले लेना,
आज सभा होगी भारी॥

मोहन लल्ली पुलिस बनेंगे,
हम भाषण करने वाले।
वे लाठिया चलाने वाले,
हम घायल मरने वाले॥

छोटे बोला देखो भैया,
मैं तो मार न खाऊंगा।
कहा बड़े ने छोटे जब तुम,
नेहरू जी बन जाओगे।
गांधी जी की बात मानकर,
क्या तुम मार न खाओगे॥

खेल खेल में छोटे भैया,
होगी झूठ मूठ की मार।
चोट न आयेगी नेहरू जी,
अब तुम हो जाओ तैयार॥

हुई सभा प्रारम्भ कहा,
गांधी चरखा चलवाओ।
नेहरू जी भी बोले भाई,
खद्दर पहनो पहनाओ॥

उठ कर फिर देवी सरोजिनी,
धीरे से बोलीं बहनों।
हिन्दू मुस्लिम मेल बढ़ाओ,
सभी शुद्ध खद्दर पहनों॥

छोड़ो सभी विदेशी चीजे़,
लो देशी सूई तागा।
इतने में लौटे काका जी,
नेहरू सीट छोड़ भागा॥

काका आये काका आये,
चलो सिनेमा जायेंगे।
घोरी दीक्षित को देखेंगे,
केक मिठाई खायेंगे॥

जीजी चलो सभा फिर होगी,
अभी सिनेमा है जाना।
चलो चलें अब जरा देर को,
घोरी दीक्षित बन जायें।
उछलें कूदें शोर मचावें,
मोटर गाड़ी दौड़ावे॥

∼ सुभद्रा कुमारी चौहान

About Subhadra Kumari Chauhan

सुभद्रा कुमारी चौहान का जन्म नागपंचमी के दिन १६ अगस्त १९०४ को इलाहाबाद (उत्तरप्रदेश) के निकट निहालपुर गाँव में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। सुभद्रा कुमारी को बचपन से ही काव्य-ग्रंथों से विशेष लगाव व रूचि था। आपका विद्यार्थी जीवन प्रयाग में ही बीता। अल्पायु आयु में ही सुभद्रा की पहली कविता प्रकाशित हुई थी। सुभद्रा और महादेवी वर्मा दोनों बचपन की सहेलियाँ थीं। सुभद्रा कुमारी का विवाह खंडवा (मद्य प्रदेश) निवासी ‘ठाकुर लक्ष्मण सिंह’ के साथ हुआ। पति के साथ वे भी इलाहाबाद में महात्मा गांधी के १९२१ के असहयोग आंदोलन से जुड़ गईं और राष्ट्र-प्रेम पर कविताएं करने लगी। १५ फरवरी १९४८ को मात्र ४३ वर्ष की अवस्था में र्भाग्यवश एक सड़क दुर्घटना में आपका निधन हो गया। इनकी रचनाएँ हैं — काव्य संग्रह : ‘मुकुल’ (१९३० में प्रकाशित हुआ) और ‘त्रिधारा'। कहानी संकलन : ‘सीधे-सादे चित्र’, ‘बिखरे मोती’ और ‘उन्मादिनी’ । ‘झाँसी की रानी इनकी बहुचर्चित रचना है। इन्हें ‘मुकुल तथा ‘बिखरे मोती पर अलग-अलग सेकसरिया पुरस्कार मिले।

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