Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » रूप के बादल – गोपी कृष्ण ‘गोपेश’
roop-ke-badal-gopi-krishna-gopesh

रूप के बादल – गोपी कृष्ण ‘गोपेश’

रूप के बादल यहाँ बरसे,
कि यह मन हो गया गीला!

चाँद–बदली में छिपा तो बहुत भाया
ज्यों किसी को फिर किसी का ख्याल आया
और, पेड़ों की सघन–छाया हुई काली
और, साँस काँपी, प्यार के डर से
रूप के बादल यहाँ बरसे…

सामने का ताल,
जैसे खो गया है
दर्द को यह क्या अचानक हो गया है?
विहग ने आवाज दी जैसे किसी को –
कौन गुजरा प्राण की सूनी डगर से!
रूप के बादल यहाँ बरसे…

दूर, ओ तुम!
दूर क्यों हो, पास आओ
और ऐसे में जरा धीरज बँधाओ –
घोल दो मेरे स्वरों में कुछ नवल स्वर,
आज क्यों यह कंठ, क्यों यह गीत तरसे!
रूप के बादल यहाँ बरसे…

गोपी कृष्ण ‘गोपेश

आपको गोपी कृष्ण ‘गोपेश जी की यह कविता “रूप के बादल” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Spot The Difference

Spot The Difference 2 – Fun Activity

Spot The Difference – अंतर बताएं – दिए गए चित्र में आप कम से कम पांच अंतर …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *