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राष्ट्र की रपट – आचार्य भगवत दूबे

राष्ट्र की रपट – आचार्य भगवत दूबे

नेतृत्व गया है भटह बंधु
क्या लिखूँ राष्ट्र की रपट बंधु

कशमीर, आंध्र, आसाम सहित
जलते हैं केरल, कटक बंधु

सूखे चेहरे कुटियाओं के
महलों की रंगत चटक बंधु

हथकड़ी नोट से कट जाती
कैदी जातें हैं सटक बंधु

अपराधी छूटें, निरपराध
फाँसी पर जाते लटक बंधु

सौ रुपय लोक–हित जो भेजे
पच्चासी जाते अटक बंधु

जो नहर बांध से जानी थी
खुद बांध गया है गटक बंधु

दरबार लगा है झूठों का
सच बात न सकती फटक बंधु

सहमी उपेक्षिता, मर्यादा
पर रही नग्नता मटक बंधु

चूहे चालाक, चुनावों में
दिग्गज को देते पटक बंधु

आचार्य मौलवी तक भटके
यह बात रही है खटक बंधु

~ आचार्य भगवत दूबे

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