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रंग उड़ाती आई होली – नीलम जैन

Rang Udaati Aai Holi - Hindi Poem

पहली किरण को देखकर,
स्मित अधरों पर यों बोली।
उषा की लाली में डूबी,
रंग उड़ाती आई होली।

सजधज कर आएँगे साथी,
आँगन भर सजती रंगोली।
नाचेंगे और गाएँगे हम,
मधुर स्वरों से भरेगी झोली।

याद आएँगे प्रियजन सारे,
दूर देस के सभी नज़ारे।
कब फिर दिन आए दोबारा,
बाबुल का घर और हमजोली।

∼ नीलम जैन

About Neelam Jain

२३ अक्तूबर १९५८ को जनमी नीलम भारत में उत्तर प्रदेश के उस हिस्से से हैं जो अब उत्तरांचल प्रदेश के नाम से जाना जाता है। वे आजकल न्यूजर्सी अमरीका में अध्यापन और सामाजिक कार्य में संलग्न हैं। कविताएँ पढ़ने लिखने के अतिरिक्त चित्रकारी में उनकी रूचि है तथा संगीत को वे जीवन का अभिन्न अंग मानती हैं।

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