Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » रंग Holi Special Hindi Baal Kavita
रंग - ओम प्रकाश बजाज

रंग Holi Special Hindi Baal Kavita

कितने-कितने कैसे-कैसे
रंगों का है लिए अम्बार,

Rang Poemप्रकृति ने सजा राखी है
विभिन्न रंगों की कैसी बहार।

फूलों में ही दे रखा है
अनगिनत रंगों का उपहार,

हर वस्तु का है रंग अलग
इन्द्रधनुष का जैसे विस्तार।

हल्के-गाढ़े चटक-चमकीले
रंगों में भी है रंग हज़ार,

प्रकृति की सुषमा ने बनाया
विशाल रंगोली सा यह संसार।

ओम प्रकाश बजाज

आपको ओम प्रकाश बजाज जी की यह बाल-कविता “रंग” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

फर्नीचर - Children's Hindi Poem on Home Furniture

फर्नीचर – Children’s Hindi Poem on Home Furniture

थोड़ा-बहुत  फर्नीचर तो हर घर में होता है, सोने, उठने-बैठने, रखने को कुछ तो होता …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *