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रंग - ओम प्रकाश बजाज

रंग Holi Special Hindi Baal Kavita

कितने-कितने कैसे-कैसे
रंगों का है लिए अम्बार,

Rang Poemप्रकृति ने सजा राखी है
विभिन्न रंगों की कैसी बहार।

फूलों में ही दे रखा है
अनगिनत रंगों का उपहार,

हर वस्तु का है रंग अलग
इन्द्रधनुष का जैसे विस्तार।

हल्के-गाढ़े चटक-चमकीले
रंगों में भी है रंग हज़ार,

प्रकृति की सुषमा ने बनाया
विशाल रंगोली सा यह संसार।

ओम प्रकाश बजाज

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