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मानसून - ओम प्रकाश बजाज

मानसून – ओम प्रकाश बजाज

मानसून की वर्षा आई,
लू-लपट से मिली रिहाई!
बच्चे-बूढ़े पुरुष महिलाएं,
हर चेहरे पर रौनक आई!
प्रतीक्षा करती हर आँख में,
इसके आने की ख़ुशी समाई!
कभी रिमझिम, कभी झमाझम,
वर्षा का क्रम बना हुआ है!
आसमान से पानी के रूप में,
जैसे अमृत बरस रहा है!
धरती और धरती वालों की,
प्यास बुझाने में जुटा हुआ है!

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