Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » मन को वश में करो, फिर चाहे जो करो – रमानाथ अवस्थी

मन को वश में करो, फिर चाहे जो करो – रमानाथ अवस्थी

मन को वश में करो
फिर चाहे जो करो।

कर्ता तो और है
रहता हर ठौर है
वह सबके साथ है
दूर नहीं पास है
तुम उसका ध्यान धरो
फिर चाहे जो करो।

सोच मत बीते को
हार मत जीते को
गगन कब झुकता है
समय कब रुकता है
समय से मत लड़ो
फिर चाहे जो करो।

रात वाल सपना
सवेरे कब अपना
रोज़ यह होता है
व्यर्थ क्यों रोता है
डर के मत मरो
फिर चाहे जो करो।

∼ रमानाथ अवस्थी

About Ramanath Avasthi

रमानाथ अवस्थी (8 नवंबर 1926 – 29 जून 2002) आकाशवाणी में प्रोडयूसर के रूप में वर्षों काम किया तथा इसी पद से सेवानिवृत्त भी हुये। रमानाथ अवस्थी का जन्म फतेहपुर, उत्तरप्रदेश में हुआ। ‘सुमन- सौरभ’, ‘आग और पराग’, ‘राख और शहनाई’ तथा ‘बंद न करना द्वार’ इनकी मुख्य काव्य-कृतियां हैं। ये लोकप्रिय और मधुर गीतकार हैं। इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरस्कृत किया है।

Check Also

Veerey Ki Wedding Movie

Bollywood 2018 Romantic Comedy Film: Veerey Ki Wedding Movie Review

Directed by: Ashu Trikha Screenplay by: Dilip Shukla Starring: Pulkit Samrat, Kriti Kharbanda, Jimmy Shergill, Satish Kaushik Genre: Comedy …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *