Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी – बाल कृष्ण गर्ग
मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी - बाल कृष्ण गर्ग

मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी – बाल कृष्ण गर्ग

मैं पीला–पीला सा प्रकाश‚ तू भकाभक्क दिन–सा उजास।
मैं आम‚ पीलिया का मरीज़‚ तू गोरी चिट्टी मेम ख़ास।
मैं खर–पतवार अवांछित–सा‚ तू पूजा की है दूब सखी!
मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी!

तेरी–मेरी ना समता कुछ‚ तेरे आगे ना जमता कुछ।
मैं तो साधारण–सा लट्टू‚ मुझमे ज्यादा ना क्षमता कुछ।
तेरी तो दीवानी दुनिया‚ मुझसे सब जाते ऊब सखी।
मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी!

कम वोल्टेज में तू न जले‚ तब ही मेरी कुछ दाल गले।
बरना मेरी है पूछ कहां हर‚ जगह तुझे ही मान मिले।
हूं सइज में भी मैं हेठा‚ तेरी हाइट क्या खूब सखी!
मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी!

बिजली का तेरा खर्चा कम‚ लेकिन लाइट में कितना दम।
सोणिये‚ इलैक्शन बिना लड़े ही‚ जीत जाए तू खुदा क़सम।
नैया मेरी मंझधार पड़ी‚ लगता जाएगी डूब सखी!
मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी!

तू मंहगी है मैं सस्ता हूं‚ तू चांदी तो मैं जस्ता हूं।
इठलाती है तू अपने पर‚ लेकिन मैं खुद पर हंसता हूं।
मैं कभी नहीं बन पाऊंगा‚ तेरे दिल का महबूब सखी!
मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी!

~ बाल कृष्ण गर्ग

Check Also

मजदूर दिवस पर हिंदी कविता - मैं एक मजदूर हूं

मजदूर दिवस पर हिंदी कविता – मैं एक मजदूर हूं

मैं एक मजदूर हूं भगवान की आंखों से मैं दूर हूं छत खुला आकाश है …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *