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मदीने वाले से मेरा सलाम कहना - आनंद बक्षी

मदीने वाले से मेरा सलाम कहना – आनंद बक्षी

ना ज़र्रो जाए मुस्तुफा धुन्धती है
दया रे रसूले खुदा धुन्धती है
मुबारक हो तुम सबको हज्ज का महिना…
ना थी मेरी किस्मत के देखू मदीना
मदीने वाले से मेरा सलाम कहना…
मदीने वाले से मेरा सलाम कहना
फटा मेरे गम से समंदर का भी सीना…
ना थी मेरी किस्मत के देखू मदीना
मदीने वाले से मेरा सलाम कहना…

Tomb of Muslim Saint Haji Aliवह कोई छोटा ना कोई बड़ा है
वह हर बशर एक ताप मे खड़ा है
वह कोई छोटा न कोई बड़ा है
वह हर बशर एक ताप मे खड़ा है
मोहम्मद की चौखट पे जो गिर पड़ा है…
उसी का है मरना उसी का है जीना…
न थी मेरी किस्मत के देखू मदीना
मदीने वाले से मेरा सलाम कहना…

बहुत दूर हू मै… तेरे अस्स्था से
मेरी हाज़री ले आता यहा से
मुझे बक्शा दे वक़्त के इम्तिहान से
के मजबूर हू मै गम-इ-दो जहा से
चुने गुल सभी ने तेरे गुलसिता से
मुझे सिर्फ काटे मिले क्यो फिजा से
तुझे सब पता है कहू क्या जुबा से
फकत एक इशारा तू कर दे वह से
के सारे है किस्मत के नाम मेहरबान के
जुदा कर ना देख एक बेटे को मा से
अगर हुक्म है मौत का आस्मा से
बदल दे मेरी जान मेरी मान की जान से
ओ शाहे-ओ-आलम ओ शाह-इ-मदीना
मुबारक हो तुम सबको हज्ज का महिना…
ना थी मेरी किस्मत के देखू मदीना
मदीने वाले से मेरा सलाम कहना…

∼ आनंद बक्षी

चित्रपट : कुली (१९८३)
निर्माता : केतन देसाई
निर्देशक : प्रयाग राज, मनमोहन देसाई
लेखक : कादर खान
गीतकार : आनंद बक्षी
संगीतकार : लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गायक : शब्बीर कुमार
सितारे : अमिताभ बच्चन, रति अग्निहोत्री, ऋषि कपूर, कादर खान, वहीदा रेहमान, पुनीत इस्सर, सुरेश ओबेरॉय

Plot Summary

It is extremely difficult to summarize the plot in short for the story has several sub-plots and situations that require a seasoned Hindi movie buff to decipher. In a nutshell, it goes something like this. Zafar Khan (played by Kader Khan) is obsessed with Salma (Waheeda Rehman) and wants to marry her at any cost. However, Salma and her father do not consent, Zafar kills the father, is arrested, and imprisoned for 10 years only to find out on his return that Salma has married Aslam Khan (Satyen Kappu) and has a son called Iqbal (Amitabh Bachchan). Zafar sabotages a dam, drowns Salma’s village & abducts Salma. (Yes, a dam nothing less).

Salma however has lost her memory, doctor advises another child and Zafar arranges for one from an orphanage. Iqbal is rescued by his uncle and raised whereas Zafar’s son Sunny (Rishi Kapoor) from orphanage is actually the uncle’s son and Iqbal’s cousin. Iqbal grows up to be a Coolie (porter) on the railway station and some sort of a local leader. Sunny is a struggling reporter with a local newspaper. The plot is further complicated by the two heroines Julie (Rati Agnihotri) who is out for revenge from Aslam (Iqbal’s father) for her father’s death (guest appearance Amrish Puri) and Deepa (Shoma Aanand) who is a childhood sweetheart of Sunny. Turns out that the Julie’s culprit is Zafar as well. (Zafar seems to be everywhere and yet there is no sign of police)

As story unfolds, all lost and found cases are returned to their roots and Zafar is confronted by Iqbal and Sunny and punished for his wrong doings.

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