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मांझी न बजाओ बंशी – केदार नाथ अग्रवाल

मांझी न बजाओ बंशी – केदार नाथ अग्रवाल

मांझी न बजाओ बंशी
मेरा मन डोलता।
मेरा मन डोलता
जैसे जल डोलता।
जल का जहाज जैसे
पल पल डोलता।
मांझी न बजाओ बंशी‚ मेरा मन डोलता।

मांझी न बजाओ बंशी
मेरा प्रन टूटता‚
मेरा प्रन टूटता
जैसे तृन टूटता‚
तृन का निवास जैसे
वन वन टूटता।
मांझी न बजाओ बंशी‚ मेरा प्रन टूटता।

मांझी न बजाओ बंशी
मेरा तन झूमता।
मेरा तन झूमता है
तेरा तन झूमता‚
मेरा तन तेरा तन
एक बन झूमता‚
मांझी न बजाओ बंशी‚ मेरा तन झूमता

~ केदार नाथ अग्रवाल

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