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मान जाओ – गगन गुप्ता ‘स्नेह’

Maan Jaoमुझे बहुत डर लगता है
तुम यूँ ही रूठ जाया न करो
कितना तड़पाता है ये मुझको
ऐसे दूर जाया न करो।

ऐसे ही मैं कुछ कह देता हूँ
दिल पर तुम लगाया न करो
स्नेह तो मैं भी करता हूँ
फिर भी, ……चलो अब छोड़ो
……… बस अब मान जाओ।

∼ गगन गुप्ता ‘स्नेह’

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