Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » माँ की याद – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
माँ की याद - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

माँ की याद – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

चींटियाँ अण्डे उठाकर जा रही हैं,
और चिड़ियाँ नीड़ को चारा दबाए,
धान पर बछड़ा रंभाने लग गया है,
टकटकी सूने विजन पथ पर लगाए,

थाम आँचल, थका बालक रो उठा है,
है खड़ी माँ शीश का गट्ठर गिराए,
बाँह दो चमकारती–सी बढ़ रही है,
साँझ से कह दो बुझे दीपक जलाये।

शोर डैनों में छिपाने के लिए अब,
शोर माँ की गोद जाने के लिए अब,
शोर घर-घर नींद रानी के लिए अब,
शोर परियों की कहानी के लिए अब,

एक मैं ही हूँ कि मेरी सांझ चुप है,
एक मेरे दीप में ही बल नहीं है,
एक मेरी खाट का विस्तार नभ सा,
क्योंकि मेरे शीश पर आँचल नहीं है।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

आपको सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता “माँ की याद” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Raid Movie

Bollywood 2018 Supernatural Horror Film: Pari Movie Review

Directed by: Prosit Roy Written by: Prosit Roy, Abhishek Bannerjee Starring: Anushka Sharma, Parambrata Chatterjee, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *