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माँ भूखी रहती है Mother's Day Special Hindi Poem

माँ भूखी रहती है Mother’s Day Special Hindi Poem

माँ भूखी रहती है
खिलाने के लिए,
मेहनत मजदूरी करती है
पढ़ाने के लिए।

सादगी में रहती है
अच्छा पहनाने के लिए,
लाल-पीली होती है
सही राह दिखाने के लिए।

खून-पसीना बहाती है
अच्छा इंसान बनाने के लिए,
हर गम सहती है
बुराइयों से बचाने के लिए।

बड़े होकर कुछ कर दिखाएँ
गर्व करने के लिए,
किसी एक के लिए नहीं
कहती है सारे जमाने के लिए।

∼ सीता चौधरी

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