Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » किताबें कुछ कहना चाहती हैं – सफ़दर हाश्मी

किताबें कुछ कहना चाहती हैं – सफ़दर हाश्मी

Face Booksकिताबें करती हैं बातें
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक-एक पल की
ख़ुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की
क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें?

किताबें कुछ कहना चाहती हैं।
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं॥

Thoughtful Booksकिताबों में चिड़िया चहचहाती हैं
किताबों में खेतियाँ लहलहाती हैं
किताबों में झरने गुनगुनाते हैं
परियों के किस्से सुनाते हैं

किताबों में राकेट का राज़ है
किताबों में साइंस की आवाज़ है
किताबों में कितना बड़ा संसार है
किताबों में ज्ञान की भरमार है
क्या तुम इस संसार में
नहीं जाना चाहोगे?

किताबें कुछ कहना चाहती हैं।
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं॥

∼ सफ़दर हाश्मी

Check Also

Chinese New Year

Chinese New Year

(to the tune of “Old MacDonald Had a Farm”) Here come the new years Marching …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *