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Karva Chauth Festival Hindi Poem करवा चौथ का चाँद

Karva Chauth Festival Hindi Poem करवा चौथ का चाँद

सुबह सवेरे मुंह अँधेरे,
उठ पूजा कर, कुछ कौर,
सखिसंग मुंह में धकेले।

दिनभर बिन खानपान,
कछुए सी घडी की चाल,
पेट आंते मचाये भूचाल।

साँझ बनसंवर पूजा कर,
रीतिरिवाज निपटा कर,
मौजमस्ती भी करी जीभर।

अब पिया का राह ताकें,
सभी को खिला पिलाकर,
टकटकी लगी आसमान पर।

ऐ चाँद कहाँ छुपे हो,
आजाओ झलक दिखाओ,
पूजा करवा व्रत तोडवाओ।

एक चाँद पलकों में,
एक इतराए अर्श पर,
लुका छिप्पी करे बादलों में।

अपने चाँद की उम्र के लिए पूजन,
दूजे की झलक को उत्सुक यह मन,
ऐ चाँद चांदनी को चंद लम्हे करो अर्पण।

कहाँ छिपे हो निर्मोही,
हलक जिव्हा सूखे मोरी,
तपस्या सार्थक कीजो जल्दी।

आज है करवा चौथ,
पूरा दिन किया उपवास,
ऐ चाँद दौडे आओ हमारे पास।

बीना गुप्ता

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