Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » जो हवा में है – उमाशंकर तिवारी

जो हवा में है – उमाशंकर तिवारी

Air Travelerजो हवा में है, लहर में है
क्यों नहीं वह बात,
मुझमें है?

शाम कन्धों पर लिए अपने
ज़िन्दगी के रू-ब-रू चलना
रोशनी का हमसफ़र होना
उम्र की कैंडिल का जलना

आग जो जलते सफ़र में है
क्यों नहीं वह बात,
मुझमें है?

Skyscraperरोज़ सूरज की तरह उगना
शिखर पर चढ़ना, उतर जाना
घाटियों में रंग भर जाना
फिर सुरंगों से गुज़र जाना

जो हँसी कच्ची उमर में है
क्यों नहीं वह बात,
मुझमें है?

एक नन्हीं जान चिड़ियाँ का
डा़ल से उड़कर हवा होना
सात रंगों की लिए दुनिया
वापसी में नींद भर सोना

जो खुला आकाश स्वर में है
क्यों नहीं वह बात,
मुझमें है?

∼ उमाशंकर तिवारी

Check Also

अगर ऐसा होता है तो धन, नाम और यश मिट्टी में मिल जाता है

अगर ऐसा होता है तो धन, नाम और यश मिट्टी में मिल जाता है

वास्तुशास्त्र अनुसार जब किसी व्यक्ति के निवास यां कार्यक्षेत्र का देव स्थान दूषित होता है …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *