Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » जाने क्या हुआ – ओम प्रभाकर

जाने क्या हुआ – ओम प्रभाकर

जाने क्या हुआ कि दिन
काला सा पड़ गया।

चीज़ों के कोने टूटे
बातों के स्वर डूब गये
हम कुछ इतना अधिक मिले
मिलते–मिलते ऊब गये
आँखों के आगे सहसा–
जाला–सा पड़ गया।

तुम धीरे से उठे और
कुछ बिना कहे चल दिये
हम धीरे से उठे स्वयं को–
बिना सहे चल दिये
खुद पर खुद के शब्दों का
ताला सा पड़ गया।

जाने क्या हुआ कि दिन
काला सा पड़ गया।

∼ ओम प्रभाकर

About 4to40 Team

Check Also

मजदूर दिवस पर हिंदी कविता - मैं एक मजदूर हूं

मजदूर दिवस पर हिंदी कविता – मैं एक मजदूर हूं

मैं एक मजदूर हूं भगवान की आंखों से मैं दूर हूं छत खुला आकाश है …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *