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हुआ पसीने से तर: तपती गर्मी पर हिंदी बाल-कविता

हुआ पसीने से तर: तपती गर्मी पर हिंदी बाल-कविता

गर्मी में खाने को मैंने
फ्रिज से सेब निकाला,
गिरते-गिरते बचा हाथ से
झट से उसे संभाला।

बाहर आते ही गर्मी से
हुआ बहुत बेहाल,
बोला भइया नहीं उतारो
मेरी नाजुक खाल।

घबराहट में सिसक पड़ा वह
लगा कांपने थर-थर,
आंसू भर रोया बेचारा
हुआ पसीने से तर।

~ रावेंद्र कुमार रवि

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