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होली यूं मनायेंगे - सुजीत सिंह

होली यूं मनायेंगे – सुजीत सिंह

रंग की फुहार है, गीत की बहार है।
बॉंटता जो प्यार है, होली का त्यौहार है।
धूम ही मचायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

यारों की टोली में, गॉंव की होली में।
हाथों में रंग लिये, पिचकारी संग लिये।
झूमझूम गायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

गॉंव की जो गोरियॉं, भाभी और छोरियां।
देख रंग हाथों में, घुस गई अहातों में।
दरवज्जा तुडवायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

रंग लगा गालों में, भर अबीर बालों में।
बीती बात भूल गये, हम गले से झूल रहे।
भेद सब मिटायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

पंहुचे नदी के घाट पर, भंगिया को बॉंट कर।
छान कर डटाई है, मस्ती खूब छाई है।
गीत गुनगुनायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

कधे पर शर्ट टॉंग, धर के विचित्र स्वांग।
होंठों पर गीत फाग, ढपली पर बजे राग।
तुमको नचवायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

बाटी और दाल है, चूरमा कमाल है।
पत्तों की थाली है, गंध भी मतवाली है।
डट के खूब खायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

रंग की फुहार है, गीत की बहार है।
बॉंटता जो प्यार है, होली का त्यौहार है।
धूम ही मचायेंगे, होली यूं मनायेंगे॥

सुजीत सिंह

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