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Hindi Poem on Improper Inclinations अनुचित हठ

Hindi Poem on Improper Inclinations अनुचित हठ

देखा-देखी में अक्सर बच्चे,
अनुचित मांगें कर बैठते हैं।

फिर उनकी पूर्ति  के लिए,
मम्मी-पापा को परेशान करते हैं।

बच्चे यह समझ नहीं पाते कि,
सब की आय एक सी नहीं होती।

हर वस्तु खरीदने की सामर्थ्य भी,
सब की एक समान नहीं होती।

सब मां-बाप अपने बच्चों की,
हर इच्छा पूरी करना चाहते हैं।

पर पैसे की तंगी के चलते,
कई बार वैसा कर नहीं पाते हैं।

बच्चों, तुम भी समझदारी दिखाना,
अनावश्यक वस्तु की मांग न उठाना।

~ ओम प्रकाश बजाज

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