Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » हमारा अतीत (भारत–भारती से) – मैथिली शरण गुप्त

हमारा अतीत (भारत–भारती से) – मैथिली शरण गुप्त

शैशव दशा में देश प्रायः जिस समय सब व्याप्त थे,
निःशेष विषयों में तभी हम प्रौढ़ता को प्राप्त थे।
संसार को पहले हमीं ने ज्ञान भिक्षा दान की,
आचार की, व्यापार की, व्यवहार की, विज्ञान की।

‘हाँ’ और ‘ना’ भी अन्य जन करना न जब थे जानते,
थे ईश के आदेश तब हम वेदमंत्र बखानते।
जब थे दिगंबर रूप में वे जंगलों में घूमते,
प्रासाद–केतन–पट हमारे चन्द्र को थे चूमते।

यद्यपि सदा परमार्थ ही में स्वार्थ थे हम मानते,
पर कर्म से फल कामना करना न हम थे जानते।
विख्यात जीवन व्रत हमारा लोकहित एकान्त था
‘आत्मा अमर है, देह नश्वर’ यह अटल सिद्धांत था।

फैला यहीं से ज्ञान का आलोक सब संसार में,
जागी यहीं थी जग रही जो ज्योति अब संसार में।
इंजील और कुरान आदिक थे न तब संसार में,
हमको मिला था दिव्य वैदिक बोध जब संसार में।

जिनकी महत्ता का न कोई पा सका है भेद ही,
संसार में प्राचीन सबसे हैं हमारे वेद ही।
प्रभु ने दिया यह ज्ञान हमको सृष्टि के आरंभ में,
है मूल चित्र पवित्रता का सभ्यता के स्तम्भ में।

विख्यात चारो वेद मानो चार सुख के सार हैं,
चारो दिशाओं में हमारे वे विजय ध्वज चार हैं।
वे ज्ञान गरिमागार हैं, विज्ञान के भंडार हैं,
वे पुण्य–पारावार हैं, आचार के आधार हैं।

जो मृत्यु के उपरांत भी सबके लिए शांतिप्रदा–
है उपनिषद विद्या हमारी एक अनुपम सम्पदा ।
इस लोक को परलोक से करती वही एकत्र हैं,
हम क्या कहें, उसकी प्रतिष्ठा हो रही सर्वत्र है।

है वायुमण्डल में हमारे गीत अब भी गूँजते
निर्झर, नदी, सागर, नगर, गिरि, वन सभी हैं कूजते
देखो हमारा विश्व में कोई नहीं उपमान था
नरदेव थे हम, और भारत देव लोक समान था।

∼ मैथिली शरण गुप्त (राष्ट्र कवि)

About Maithili Sharan Gupt

राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त (३ अगस्त १८८६ – १२ दिसम्बर १९६४) हिन्दी के कवि थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली को अपनी रचनाओं का माध्यम बनाया और अपनी कविता के द्वारा खड़ी बोली को एक काव्य-भाषा के रूप में निर्मित करने में अथक प्रयास किया और इस तरह ब्रजभाषा जैसी समृद्ध काव्य-भाषा को छोड़कर समय और संदर्भों के अनुकूल होने के कारण नये कवियों ने इसे ही अपनी काव्य-अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया। हिन्दी कविता के इतिहास में गुप्त जी का यह सबसे बड़ा योगदान है। पवित्रता, नैतिकता और परंपरागत मानवीय सम्बन्धों की रक्षा गुप्त जी के काव्य के प्रथम गुण हैं, जो पंचवटी से लेकर जयद्रथ वध, यशोधरा और साकेत तक में प्रतिष्ठित एवं प्रतिफलित हुए हैं। साकेत उनकी रचना का सर्वोच्च शिखर है। मैथिलीशरण गुप्त जी की बहुत-सी रचनाएँ रामायण और महाभारत पर आधारित हैं। १९५४ में पद्म भूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार से सम्मानित। प्रमुख कृतियाँ — • महाकाव्य – साकेत; • खंड काव्य – जयद्रथ वध, भारत-भारती, पंचवटी, यशोधरा, द्वापर, सिद्धराज, नहुष, अंजलि और अर्ध्य, अजित, अर्जन और विसर्जन, काबा और कर्बला, किसान, कुणाल गीत, गुरु तेग बहादुर, गुरुकुल, जय भारत, झंकार, पृथ्वीपुत्र, मेघनाद वध, मैथिलीशरण गुप्त के नाटक, रंग में भंग, राजा-प्रजा, वन वैभव, विकट भट, विरहिणी व्रजांगना, वैतालिक, शक्ति, सैरन्ध्री, स्वदेश संगीत, हिडिम्बा, हिन्दू; • अनूदित – मेघनाथ वध, वीरांगना, स्वप्न वासवदत्ता, रत्नावली, रूबाइयात उमर खय्याम।

Check Also

Most coconuts smashed in one minute

Most coconuts smashed in one minute

Kerala, India – March 1, 2017 – Abeesh Dominic, 25, a native of Poonjar in …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *