Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » गरीब की दिवाली
गरीब की दिवाली

गरीब की दिवाली

पटाखों कि दुकान से दूर हाथों में,
कुछ सिक्के गिनते मैंने उसे देखा।

एक गरीब बच्चे कि आखों में,
मैने दिवाली को मरते देखा।

थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की,
पर उन्ही पूराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा।

हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश,
उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा।

जब मैने कहा, “बच्चे, क्या चहिये तुम्हे”?
तो उसे चुप-चाप मुस्कुरा कर “ना” में सिर हिलाते देखा।

थी वह उम्र बहुत छोटी अभी,
पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देखा।

रात को सारे शहर के दीपो कि लौ में,
मैने उसके हँसते, मगर बेबस चेहरें को देखा।

हम तो जीन्दा है अभी शान से यहा,
पर उसे जीते जी शान से मरते देखा।

लोग कहते है, त्योहार होते हैं जिंदगी मे खुशियों के लिए,
तो क्यो मैंने उसे मन ही मन मे घूटते और तरस्ते देखा?

~ व्हाट्सप्प पर शेयर की गयी

Check Also

Jain Holidays and Observances: Jain Culture & Traditions

Jain Holidays and Observances: Jain Culture & Traditions

Mahavira Jayanti: This festival celebrates the day of Mahavira’s birth. Jains will gather in temples …

One comment

  1. Nice and heart touching poetry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *