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दफ्तर का बाबू – सुरेश उपाध्याय

दफ्तर का एक बाबू मरा
सीधा नरक में जा कर गिरा
न तो उसे कोई दुख हुआ
ना ही वो घबराया
यों खुशी में झूम कर चिल्लाया–
‘वाह वाह क्या व्यवस्था है‚ क्या सुविधा है‚
क्या शान है! नरक के निर्माता तू कितना महान है!

आंखों में क्रोध लिये यमराज प्रगट हुए
बोले‚
‘नादान दुख और पीड़ा का
यह कष्टकारी दलदल भी
तुझे शानदार नज़र आ रहा है?’
बाबू ने कहा‚
‘माफ करें यमराज।
आप शायद नहीं जानते
कि बंदा सीधा हिंदुस्तान से आ रहा है।’

— सुरेश उपाध्याय

About Suresh Upadhyay

सुरेश उपाध्याय, जन्म– 15 जुलाई 1943 होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ। शिक्षा– एम. ए. सागर विश्विद्यालय से हुआ। ‘कवि सम्मलेन’ और ‘मजे ले लो’ फिल्मों में कवि रूप में प्रस्तुति हुई। 1982 में काका हाथरसी हास्य पुरस्कार से सम्मानित।

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