Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » दाने – केदार नाथ सिंह

दाने – केदार नाथ सिंह

नहीं
हम मंडी नहीं जाएंगे
खलिहान से उठते हुए
कहते हैं दाने

जाएँगे तो फिर लौट कर नहीं आएँगे
जाते जाते
कहते जाते हैं दाने

अगर लौट कर आए भी
तो तुम हमें पहचान नहीं पाओगे
अपनी अंतिम चिट्ठी में
लिख भेजते हैं दाने

उसके बाद महीनों तक
बस्ती में
काई चिट्ठी नहीं आती

— केदार नाथ सिंह

About Kedar Nath Singh

केदार नाथ सिंह (जन्म 1934 ई.) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। वे अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि हैं। भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा उन्हें वर्ष 2013 का 49 वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिये जाने का निर्णय किया गया। वे यह पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के 10 वें लेखक हैं। केदार नाथ सिंह का जन्म 1934 ई॰ में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया गाँव में हुआ था। उन्होंने बनारस विश्वविद्यालय से 1956 ई॰ में हिन्दी में एम॰ए॰ और 1964 में पी-एच॰ डी॰ की उपाधि प्राप्त की। वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में बतौर आचार्य और अध्यक्ष काम कर चुके हैं। केदार नाथ सिंह को मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, जीवन भारती सम्मान, दिनकर पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान आदि पुरस्कारों मिल चुके हैं।

Check Also

Father's Day Slogans in Hindi

Father’s Day Slogans in Hindi

फादर्स डे पिताओं के सम्मान में एक व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व हैं …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *