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Chasma by Om Prakash Bajaj

चश्मा – ओम प्रकाश बजाज

दादा जी जब चश्मा लगाते,

तभी वह अखबार पढ़ पाते।

मुन्ना भी है चश्मा लगाता,

तभी उसे दूर का साफ़ नज़र आता।

नज़र जब कमजोर हो जाती,

चश्मा लगाने से सुविधा हो जाती।

बाइफोकल चश्मे भी आते,

निकट और दूर का साफ़ दिखाते।

कई लोग कान्वेंट लैंस लगाते,

वे चश्मा लगाने से बच जाते।

धूप में रंगीन चश्मा लगाया जाता,

जो धूप से आँखों को बचाता।

चश्मा लग जाए तो उसे लगाना,

उसे ख़राब होने से भी बचाना।

~ ओम प्रकाश बजाज

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