Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » चक्कर पे चक्कर – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
चक्कर पे चक्कर - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

चक्कर पे चक्कर – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

आओ एक बनाएं चक्कर
फिर उस चक्कर में इक चक्कर
फिर उस चक्कर में इक चक्कर
फिर उस चक्कर में इक चक्कर
Circlesऔर बनाते जाएं जब तक
ऊब न जाएं थक कर।

फिर सबसे छोटे चक्कर में
म्याऊं एक बिठाएं
और बाहरी एक चक्कर में
चूहों को दौड़ाएं।

दौड़-दौड़ कर सभी थकें
हम बैठे मारें मक्कर,
नींद लगे हम सो जाएं
वे देखें उझक-उझक कर।

आओ एक बनाएं चक्कर।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

आपको सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता “चक्कर पे चक्कर” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Inspirational Desh Prem Poetry इसी देश में

इसी देश में – प्रभुदयाल श्रीवास्तव

इसी देश में कृष्ण हुये हैं, इसी देश में राम। सबसे पहिले जाना जग ने, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *