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Bal Kavita on Indian Festivals खुशियों के त्यौहार

Bal Kavita on Indian Festivals खुशियों के त्यौहार

ईद दिवाली ओणम क्रिसमस
खुशियों के त्यौहार।
लगकर गले बधाई दें लें
झूमें नाचें यार।

हम सब भारत मां के बेटे
सबके सुख दुख एक।
सभी सुखी हों यही मनाते,
तजें न अपनी टेक।

भाईचारा मजहब अपना
मानवता ईमान।
आंसू पोछें हर पीड़ित के
बन सच्चे इंसान।

नूर खुदाई सबमें देखा
कोई दिखा न गैर।
हाथ जोडकर रब से मांगें
सबकी रखना खैर।

दहशतगर्दी से लड़ना है
हर इंसां का फर्ज।
बहा पसीना चुका सकेंगे
भारत मां का कर्ज।

गुझिया सिंवई खिकायें खायें
हों साझे त्यौहार।
अंतर से अंतर का अंतर
मिटा लुटायें प्यार।

~ संजीव वर्मा “सलिल”

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