Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » अंतिम मिलन – बालकृष्ण राव
अंतिम मिलन - बालकृष्ण राव

अंतिम मिलन – बालकृष्ण राव

याद है मुझको, तुम्हें भी याद होगा
मार्च की वह दोपहर, वह धूल गर्मी
और वह सूनी सड़क, जिस पर हजारों
पत्तियों सूखी हवा में उड़ रही थीं।

हम खड़े थे पेड़ हे नीचे, किनारे,
एक ने पूछा, कहा कुछ दूसरे ने,
फिर लगे चुपचाप होकर सोचने हम
कौन यह पहले कहेगा “अब विदा दो”।

क्या हुए थे प्रश्न, क्या उत्तर मिले थे
कौन जाने आज, अब है याद केवल
दोपहर की, और उस सूनी सड़क की
धूल, गर्मी और उड़ती पत्तियों की,

और इसकी भी कि दोनों सोचते थे
कौन यह पहले कहेगा “अब विदा दो”।

∼ बालकृष्ण राव

Check Also

Longest Love Poem

Longest Love Poem

Banská Štiavnica, Slovakia – April 23, 2017 – “Marína” is a great work of a …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *