Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » अंतहीन यात्री – धर्मवीर भारती
अंतहीन यात्री - धर्मवीर भारती

अंतहीन यात्री – धर्मवीर भारती

विदा देती एक दुबली बाँह-सी यह मेड़
अंधेरे में छूटते चुपचाप बूढ़े पेड़

ख़त्म होने को ना आएगी कभी क्या
एक उजड़ी माँग-सी यह धूल धूसर राह?

एक दिन क्या मुझी को पी जाएगी
यह सफ़र की प्यास, अबुझ, अथाह?

क्या यही सब साथ मेरे जाएँगे
ऊँघते कस्बे, पुराने पुल?

पाँव में लिपटी हुई यह धनुष-सी दुहरी नदी
बींध देगी क्या मुझे बिलकुल?

∼ धर्मवीर भारती

Check Also

पेड़ सदा शिक्षा देता है - शिक्षाप्रद हिंदी कविता

पेड़ सदा शिक्षा देता है – शिक्षाप्रद हिंदी कविता

पेड़ सदा शिक्षा देता है जीव जंतुओं की ही भांति, वृक्षों में जीवन होता है। …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *