Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » अक्ल कहती है – बाल स्वरूप राही
अक्ल कहती है - बाल स्वरूप राही

अक्ल कहती है – बाल स्वरूप राही

अक्ल कहती है, सयानों से बनाए रखना
दिल ये कहता है, दीवानों से बनाए रखना

लोग टिकने नहीं देते हैं कभी चोटी पर
जान–पहचान ढलानों से बनाए रखना

जाने किस मोड़ पे मिट जाएँ निशाँ मंज़िल के
राह के ठौर ठिकानों से बनाए रखना

हादसे हौसले तोड़ेंगे सही है फिर भी
चंद जीने के बहानों से बनाए रखना

शायरी ख़वाब दिखाएगी कई बार मगर
दोस्ती ग़म के फ़सानों से बनाए रखना

आशियाँ दिल में रहे आसमान आँखों में
यूँ भी मुमकिन है उड़ानों से बनाए रखना

दिन को दिन, रात को जो रात नहीं कहते हैं
फ़ासले उनके बयानों से बनाए रखना

एक बाज़ार है दुनिया जो अगर ‘राही जी’
तुम भी दो–चार दुकानों से बनाए रखना

~ बाल स्वरूप राही

आपको बाल स्वरूप राही जी की यह कविता “अक्ल कहती है” कैसी लगी – आप से अनुरोध है की अपने विचार comments के जरिये प्रस्तुत करें। अगर आप को यह कविता अच्छी लगी है तो Share या Like अवश्य करें।

यदि आपके पास Hindi / English में कोई poem, article, story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें। हमारी Id है: submission@4to40.com. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ publish करेंगे। धन्यवाद!

Check Also

Hindi Poem about Karwa Chauth Festival करवा चौथ

करवा चौथ: सीमा सच – भारतीय सुहागिन का त्यौहार

करवा चौथ का त्यौहार, लाए ख़ुशियाँ हजार हर सुहागिन के दिल का, ये अरमान है प्यारे पिया …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *