Home » Poems For Kids » Poems In Hindi » अभिनन्दन नव वर्ष – सतीश चन्द्र उपाध्याय

अभिनन्दन नव वर्ष – सतीश चन्द्र उपाध्याय

Abhinandan Nav Varshबीत गए दिन ताप त्रास के
अब हो चहुँ दिश हर्ष
नई-नई खुशियों को लेकर
आए यह नव वर्ष ।

धान्यपूर्ण हो बसुंधरा
अक्षय धन भंडार भरा
अलग बने पहचान विश्व में
कृषि से भारतवर्ष ।

दूर विषमता हो समाज की
दीर्घायु जनतंत्र राज की
मानव मानव को सम समझें
कोई न हो अस्पर्श्य ।

झगड़े दंगे ना दुर्घटनाएँ
काल के गाल ना मानव जाएँ
कवच बने मानव समाज का
तकनीकी उत्कर्ष ।

∼ Satish Chandra Upadhyay

Check Also

नूतन वर्ष – राजीव रंजन प्रसाद

nutan-varsh-rajeev-ranjan-prasad नवीनता के पंख होते हैं और वर्ष पलों के पंखों से उड़ता थामे आता …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *