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आसमान – गोविन्द भारद्वाज

नीला-नीला आसमान है,
नीचे सुन्दर एक जहान है।

बादल रहते इसके संग,
कितना अच्छा इसका संग।

पंछी ऊँची उड़ान भरे
भला इनका भगवान करे।

चाँद-तारों का है यह घर,
सूरज रहे लटका दिन-भर।

छिपा इसमें खगोल बड़ा,
पीछे इसके भूगोल बड़ा।

इसे छूने का अरमान है,
नीला-नीला आसमान है।

∼ गोविन्द भारद्वाज

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