Home » Folktales For Kids » Folktales In Hindi » Kindness Story of Poor Lame Boy गरीब लँगड़े लड़के की दयालुता
Kindness Story of Poor Lame Boy गरीब लँगड़े लड़के की दयालुता

Kindness Story of Poor Lame Boy गरीब लँगड़े लड़के की दयालुता

एक गृहस्थ एक गाँव के समीप अपनी घोड़ागाड़ी धीरे-धीरे हाँकते हुए आसपास में कोई जलाशय खोज रहा था; क्योंकि उसके घोड़े बहुत ही थके हुए और प्यासे थे। इतने में छोटी झोंपड़ी दीख पड़ी। उसके आँगन में एक दस-बारहा वर्ष का लड़का बैठा था। दूर से घोड़ों को थके और प्यासे देखकर तुरंत ही वह लड़का झोंपड़ी में जाकर पानी से भरा हुआ एक डोल लाया और गाड़ी आने के पहले ही सड़क पर जाकर खड़ा हो गया।

Kindness Story of Poor Lame Boyउस गृहस्थ ने उसे देखकर गाडी खड़ी कर दी और उस लड़के से पूछा- ‘लड़के ! तू क्या चाहता है?’

लड़के ने कहा – ‘मैं कुछ नही चाहता, मैं तो तुम्हारे घोड़ों को पानी पिलाने आया हूँ।’ इतना कहकर उसने अपने हाथ के डोल को घोड़ों के सामने रख दिया। घोड़े पानी पीकर तृप्त हो गये।

उसके बाद उस गृहस्थ पाकेट में से चाँदी के सिक्के निकाले और उस लड़के को देना चाहा।

लड़का बोला – ‘महाशय ! मैं पैसे के लिये पानी नही लाया। मैं गरीब लँगड़ा लड़का हूँ, मेरी माँ खेत के काम करती है, उससे हम दोनों को भोजन मिल जाता है। मेरी माँ ने ही मुझसे कहा है कि जब ईश्वर ने तुझे ऐसी स्थिति में डाला है तो इसमें भी उनका कोई अच्छा उदेश्य होगा; क्योंकि ईश्वर जो करता है, वह अच्छे के लिये ही करता है। तू अधिक चल नही सकता है; तो यहीं रहकर प्यासे आदमियों और जानवरो को पानी पिलाया कर, इससे भी ईश्वर का काम हो सकेगा। यहाँ से आठ मीलतक पानी का झरना या गाँव नही है। इसीलिये अपने इस कूँए में से पानी निकालकर उसका सदुपयोग करना ठीक होगा। अपनी माँ का यह कहना मुझे बहुत ठीक लगा और उसी के अनुसार मैं यह काम करता हूँ और इसको ईश्वर का काम तथा अपना कर्तव्य समझता हूँ। मैं पैसा नही लेता।’

उस गृहस्थ ने जब लड़के के मुख की ओर देखा तो उसे उसमे परोपकार और धार्मिकता का तेज दिखायी पड़ा। लड़के के इस सदाचार को देखकर वह बहुत ही प्रसन्न हुआ और मन में ईश्वर की महिमा का गान करने लगा। उसके बाद वह लड़के को उत्साह के कुछ शब्द कहकर और उसका उपकार मान कर वहाँ से चला गया।

एक असत्क लड़का भी निःस्वार्थ भाव से कैसा परोपकार कर सका, यह बात ठीक-ठीक उसकी समझ में आने पर उसके मन के ऊपर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और वह भी अच्छे-अच्छे परोपकार के काम करने लगा। परोपकार की कितनी बड़ी महिमा है।

Check Also

रविवार की छुट्टी पर हिंदी बाल-कविता - आज हमारी छुट्टी है

रविवार की छुट्टी पर हिंदी बाल-कविता – आज हमारी छुट्टी है

रविवार का प्यारा दिन है, आज हमारी छुट्टी है। उठ जायेंगे क्या जल्दी है, नींद …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *