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Gopal ka ilaaj

गोपाल का इलाज

गोपाल भांड नहुत ही बुद्धिमान और मेहनती आदमी था। उसकी बुद्धि और व्यवहार कुशलता के बहुत चर्चे थे। लोगों की हर समस्या का हल वह चुटकियों में करता था। इसलिए उसके पास लोग अपनी – अपनी मुश्किलें लेकर आते ही रहते थे।

किस्मत की बात है – उसके पड़ोस में एक निहायत कमअक्ल दम्पति रहता था। उस पर तुर्रा यह कि पति और पत्नी – दोनों ही दिन में सपने देखने के शौक़ीन थे। अपने वर्तमान को बेहतर बनाने की अपेक्षा, दोनों अपना अधिकतर समय भविष्य के सुनहरे सपने देखने में बिताते थे।

एक दिन वह आदमी अपनी पत्नी से बोला कि वह एक गाय खरीदना चाहता है जिससे कि उनके घर में दूध कि नदियां बहें।

फिर क्या था! दोनों ने एक अदद गाय खरीदने की योजना बना डाली और देखते ही देखते उसके सपनों में खो गए। बात करते – करते उन्हें ख्याल आया कि अगर वे कुछ ज्यादा पैसा बचना शुरू कर दे, तो जल्दी वे एक गाय के मालिक होंगे। पर सच तो यह था कि उनकी जमा – पूँजी इतनी कम थी कि निकट भविष्य में गाय खरीदना तो दूर, गाय का नाम तक नही ले सकते थे। पर सपने देखने के पैसे तो लगते नही। इसलिए पति – पत्नी का गाय – संवाद चलता ही रहा। वे एक सुंदर व् दुधारू गाय खरीदेंगे, भले ही कुछ महंगी क्यों न हो। उन्हें लगता था कि पैसे की ज्यादा परवाह करने की कोई जरूरत नही। उन्होंने सोच लिया कि गाय काले रंग कि होगी और उसका नाम होगा ‘कमली’।

आदमी ने सोच लिया कि वह जल्द से जल्द कमली के लिए एक तबेला बनवाएगा। उसकी पत्नी भला क्यों पीछे रहती! उसने सोच लिया कि वह जल्दी ही दूध दुहने और संभालने के लिए कुछ मटके खरीदेगी। आखिर उसे भी तो कमली से बहुत प्यार होगा।

यही सोचते हुए, अगले दिन वह बाजार पहुँच गई और कुछ अच्छे मटकों की खोज में जुट गई। काफी समय की मेहनत के बाद और दुकानदार से खूब मोलभाव करके, वह पांच बहुत सुंदर मटके खरीद लाई।

शाम को बड़े गर्व के साथ उसने अपने पति को वे मटके दिखाए। पहले मटके में कमली से दूहा दूध, दुसरे में उससे बना मक्खन, तीसरे में छाछ और चौथे में मक्खन से बना घी रखने की बात तय हुई। गाय एक, चीज़ें अनेक – ऐसा सोचकर आदमी की बांछें खिल गई।

Gopal ka ilaajदोनों ने के बार फिर कमली – कांड शुरू कर दिया – वे कमली की सेवा ऐसे करेंगे – वैसे करेंगे आदि – आदि। पत्नी बोली कि मै गाय को नित्य बढ़िया स्नान कराऊंगी और उसे खाने के लिए बढ़िया चारा दूँगी। जल्दी ही उनकी गाय दिन में दो बार बहुत सारा दूध देना शुरू कर देगी। आदमी बोला कि मैं रोज उसके लिए अच्छी घास का इंतजाम करूंगा। फिर वे बचा उहा दूध – घी बेच दिया करेंगे और शीघ्र ही बहुत पैसे वाले हो जाएंगे।

तभी आदमी ने पांचवा मटका देखा। उसने अपनी पत्नी से पूछा कि ये पांचवा मटका किसलिए लाइ हो। पत्नी ने हिचकिचाते हुए जवाब दिया कि उस घड़े में थोड़ा – सा दूध डालकर अपनी बहन के घर दे आऊँगी। ऐसा सुनकर आदमी क्रोधित हो उठा क्योंकि उसे अपनी साली फूटी आँख नही सुहाती थी। चिल्लाते हुए उसने अपनी पत्नी से पूछा, “मेरी आज्ञा के बिना अपनी बहन को दूध देने की बात तुमने सोची भी कैसे?”

पत्नी तुनककर बोली, “मुझे तुम्हारी आज्ञा की कोई जरूरत नही। कमली को खरीदने के लिए पैसे तो मैंने ही जमा किये थे और रोज मै ही उसे नहलाती – धुलाती हूँ, खिलाती – पिलाती हूँ, दूध भी रोज मै ही दुहती हूँ। इसलिए बचे हुए दूध का मै जो चाहूँ कर सकती हूँ।”

इतना सुना तो आदमी गुस्से से लाल – पीला होने लगा। “तुमने जो पैसे बचाए, वो मेरे ही खून – पसीने की कमाई के थे,” वह चिल्लाया। “मै ही कमली के लिए घास काटता हूँ। और तुम मेरे परिश्रम का फल अपनी मूर्ख बहन को देना चाहती हो। उसने तो हमे आज तक एक फूटी कौड़ी तक नही दी।”

इस तरह दोनों की लड़ाई चलती रही और दोनों ही अपनी – अपनी बात पर खड़े रहे। आखिर में वह आदमी आपे से बाहर हो गया और उसने एक – एक करके सब घड़े फोड़ डाले। “अब कहो, अपनी बहन के घर दूध कैसे लेकर जाओगी?” उसने पत्नी से पूछा।

गोपाल बहुत देर से यह सब सुन रहा था पर आखिर उससे चुप नही रहा गया। वह उन दोनों के पास गया और पूछने लगा कि आखिर माजरा क्या है।

आदमी एकदम से बोल पड़ा, “यह औरत हमारी कमली का बचा हुआ सारा दूध अपनी बहन को दे देना चाहती है।”

“कमली?” गोपाल ने पूछा। “तुम किसकी बात कर रहे हो?”

“ओह! तुम्हे नही पता, कमली हमारी गाय का नाम है,” आदमी बोला।

गोपाल बहुत हैरान हुआ। उसने तो कभी उनके घर कोई गाय नही देखी थी। उसने फिर पूछा, “तुम्हारी गाय? कहाँ है तुम्हारी गाय?”

आदमी को फिर भी अपनी मूर्खता का अहसास नही हुआ। “वही गाय, जिसे हम खरीदने वाले हैं। जैसे ही हमारे पास ठीक – ठीक पैसे जमा हो जाएंगे, हमारे पास एक स्वस्थ, सुंदर गाय होगी, जो हमे खूब दूध देगी। पर मेरी पत्नी सब बचा हुआ दूध अपनी बहन को देना चाहती है और मै उसे बेचना चाहता हूँ,” वह बोला।

पत्नी ने उसे टोका, “मैंने सारे दूध के लिए नही, थोड़े – से के लिए कहा था। आखिर हमारे पास इतना सारा दूध है।”

गोपाल ने उसे याद दिलाया कि फिलहाल तो उनके पास दूध है ही नही और न ही होगा, जब तक कि वे गाय खरीद न ले।

इस बार पति – पत्नी एक साथ बोले, “तुम देखते जाओ। हमने पैसे बचाने शुरू कर दिए हैं। कमली हमारे घर बस आई ही समझो।”

जब गोपाल ने उनसे पूछा कि उन्होंने कितने पैसे जमा किये हैं तो उसे पता चला कि उन्हें पैसे जोड़ते, बस एक ही दिन हुआ है। गोपाल तो समझदार था ही, फट से जान गया कि उसके पड़ोसी फिर दिन में सपने देख रहे हैं।

गोपाल ने उनकी इस बिमारी का एक झटके में इलाज करने का फैसला कर लिया। वह एकदम से चिल्लाया, “अब मुझे पता चल गया है कि मेरी सब्ज़ियों का बगीचा कौन खराब कर रहा है।” इतना कहकर, उसने एक डंडा उस आदमी के सिर पर रसीद कर दिया।

आदमी को इस आकस्मिक प्रहार की अपेक्षा नही थी। उसने गोपाल से पूछा कि उसने डंडा क्यों मारा।

गोपाल ने कहा, “तुम्हारी गाय ने मेरे खेत में सब फलियां और खीरे खा लिए है,” और एक बार फिर गोपाल ने घुमाकर एक और डंडा उसके सिर पर दे मारा।

आदमी जनता था कि गोपाल के पास कोई खेत नही था। “कैसी फलियां? कौन से खीरे? तुम किस खेत के बारे में बात कर रहे हो?”

“वही खेत, जो मै बनाने वाला हूँ,” गोपाल बोला। “सोचता हूँ, घर के पास वाली खाली जमीन में फलियां और खीरे लगाऊं।”

उस आदमी की पत्नी यह सब देख रही थी। यकायक उसे गोपाल की बात समझ में आ गई और वह अपनी मूर्खता पर जोर से हंस पड़ी। धीरे – धीर, बात उसके पति के दिमाग में भी आ गई। दोनों ने कसम खाई कि वे फिर कभी दिन में सपने नही देखेंगे।

गोपाल ने उन्हें उनके इस संकल्प पर बधाई दी और आशा जताई कि इस वादे को भूलेंगे नही।

पर गोपाल को चिंता करने की कोई जरूरत नही थी। उस आदमी के सिर पर पड़े दो डंडे अपना निशान छोड़ गए थे, जो उसे और उसकी पत्नी को उनकी सुंदर, परन्तु काल्पनिक ‘कमली’ के बारे में लम्बे समय तक याद दिलाने के लिए पर्याप्त थे।

भारत की लोक कथाएं ~ मीनाक्षी गुप्ता जैन

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