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Freedom

आज़ादी

एक जंगल में कुछ शिकारी आये। उन्होंने जाल बिछाया और एक शेर को पकड लिया। पिंजरे में शेर को बंध कर वो शहर ले आये, एक वैज्ञानिक ने उस शेर को ऊंचे दाम देकर खरीद लिया। उस वैज्ञानिक का मासूम प्राणियो पर तरह तरह के प्रयोग करना मनपसंद विषय था। इंसानों द्वारा प्रयोग की जाने वाली चीजो का प्राणियो पर क्या असर होती है? उसी का वो अभ्यास करता! इसी प्रयोग के अनुसंधान में वो उसके पास मोजूद सभी जानवरों को रोज रात शराब भी पिलाता और उनकी होने वाली प्रतिक्रियाओ का अभ्यास करता। अब शेर भी उसके प्रयोग का हिस्सा बन गया था!

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वहा जंगल में खलबली मच गई थी। अपने भाई को कोई ले गया है। इस खबर से बाकी के शेर चिंतित हो गए! गाड़ी के टायरो की निशानी की सहायता से वे शहर तक पहुचे। शहर में भगदड़ मच गई जंगल से आये शेरो ने अपनी जान पे खेल कर अपने पकडे गए शेर भाई को आजाद करवाया। और जंगल की और भागे। इस कार्य में कुछ शेर जख्मी भी हुए। पर उनका भाई आजाद था। उनके साथ था उसकी ख़ुशी उन्हें ज्यादा थी! वृद्ध शेर ने कहा “शेर कभी पिंजरे में नहीं रहता। हमारी जाती महान है और हम किसी के गुलाम बनकर नहीं रह सकते।”

सभी शेर सहमती में गुराए…

इस बात को दो दिन ही बीते थे की जिस शेर को अपनी जान पे खेल कर छुड़ा के लाये थे – वो अचानक ही गायब हो गया। सभी शेर हेरान – परेशान हो गए आखिर वो गया तो गया कहा? उन्होने पुरा जंगल छान मारा पर सारी मेहनत व्यर्थ! उसका कही पता न था. थके-हारे बिचारे शेर जंगल के एक पेड के नीचे बेठे सोचने लगे, की अब क्या करे? तभी एक शेर जो पास के तालाब पे पानी पिने गया था उसने आकर कहा ” वो अब वापिस नहीं आएगा!”

वृद्ध शेर ने कहा “क्यों कहा चला गया वो?”

आये शेर ने कहा “वो वापिस शहर लोट गया है। उसी प्रयोगशाला में! कहता था यहाँ वो नहीं – जो वहां है!

वृद्ध ने कहा “क्या? क्या नही है यहा? यहाँ आजादी है, यहाँ दोस्त है! रिश्तेदार है! अमन है! शांति है! शहर में क्या है?

शांति से उस शेर ने जवाब दिया “शराब”।

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एक बार जो इसे चख ले… जिंदगी भर उसका गुलाम बन जाता है। और उसे पाने के लिए किसी का गुलाम भी!

~ प्रशांत सुभाषचंद्र सालुंके

About Prashant Subhashchandra Salunke

कथाकार / कवी प्रशांत सुभाषचंद्र साळूंके का जन्म गुजरात के वडोदरा शहर में तारीख २९/०९/१९७९ को हुवा. वडोदरा के महाराजा सर सयाजीराव युनिवर्सिटी से स्नातक तक की शिक्षा ग्रहण की. अभी ये वडोदरा के वॉर्ड २२ में भाजपा के अध्यक्ष है, इन्होने सोश्यल मिडिया पे क्रमश कहानी लिखने की एक अनोखी शुरुवात की.. सोश्यल मिडिया पे इनकी क्रमश कहानीयो में सुदामा, कातील हुं में?, कातील हुं में दुबारा?, सुदामा रिटर्न, हवेली, लाचार मां बाप, फिरसे हवेली मे, जन्मदिन, अहेसास, साया, पुण्यशाली, सोच ओर William seabrook के जीवन से प्रेरित कहानी “एक था लेखक” काफी चर्चित रही है. इसके अलवा बहोत सी छोटी छोटी प्रेरणादायी कहानीया भी इन्होने सोश्यलमिडिया पे लिखी है, वडोदरा के कुछ भुले बिसरे जगहो की रूबरू मुलाकात ले कर उसकी रिपोर्ट भी इन्होने सोश्यल मिडिया पे रखी थी, जब ये ६ठी कक्षा में थे तब इनकी कहानी चंपक में प्रकाशित हुई थी, इनकी कहानी “सब पे दया भाव रखो” वडोदरा के एक mk advertisement ने अपनी प्रथम आवृती में प्रकाशित की थी, उसके बाद सुरत के साप्ताहिक वर्तमानपत्र जागृती अभियान में इनकी प्रेरणादायी कहानिया हार्ट्स बिट्स नामक कोलम में प्रकाशित होनी शुरू हुई, वडोदरा के आजाद समाचार में इनकी कहानी हर बुधवार को प्रकाशित होती है, वडोदरा के क्राईम डिविजन मासिक में क्राईम आधारित कहानिया प्रकाशित होती है, 4to40.com पे उनकी अब तक प्रकाशित कहानिया बेटी का भाग्य, सेवा परमो धर्म, आजादी, अफसोस, चमत्कार ऐसे नही होते ओर मेरी लुसी है. लेखन के अलावा ये "आम्ही नाट्य मंच वडोदरा" से भी जुडे है, जिसमें "ते हुं नथी" तथा "नट सम्राट" जेसे नाटको में भी काम किया है, इनका कहेना है "जेसे शिल्पी पत्थर में मूर्ती तलाशता है, वैसे ही एक लेखक अपनी आसपास होने वाली घटनाओ में कहानी तलाशता है", इनका इमेल आईडी है prashbjp22@gmail.com, आप फेसबुक पे भी इनसे जुड सकते है.

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7 comments

  1. Very nice story

  2. Good story. Really very nice…

  3. Really Very nice story

  4. बहुत ही बढ़िया कहानी।

  5. बहुत ही प्रेरणादायीं

  6. Jordar kahani

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