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दिल्ली के बड़े त्योहारों में गिना जाता है छठ Chhath has become prime festival of Delhi

दिल्ली के बड़े त्योहारों में गिना जाता है छठ Chhath has become prime festival of Delhi

छठ महापर्व अब सिर्फ बिहार या पूर्वी उत्तर प्रदेश का नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली का भी लोक पर्व बन चुका है। तीन-चार दशक पहले दिल्ली में मुश्किल से कहीं छठ पर्व मनाते हुए लोगों को देखा जाता था। लेकिन आज यह तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है और दिल्ली का शायद ही कोई ऐसा कोई कोना बचा हो, जहां छठ पर्व न मनाया जाता हो। यहां तक कि इंडिया गेट से लेकर साउथ दिल्ली तक में भी यह मनाया जाने लगा है।

लाखों लोगों की भीड़ छठ घाटों पर जुटती है। आस्था के इस पर्व में न सिर्फ पूर्वांचल, बल्कि दिल्ली के लोग भी शिरकत करने लगे हैं। दिल्ली भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दूबे बताते हैं कि 50 साल पहले तो दिल्ली में छठ के बारे में लोगों को शायद ही पता था। लेकिन अब राजधानी में जिस तरह से छठ का पर्व चारों ओर मनाया जाने लगा है, उससे यह पर्व अब दिल्ली का पर्व हो चुका है। दूबे बताते हैं कि उस वक्त वे अपनी मां के लिए छठ पूजा की सामग्री पहाड़गंज जाकर खरीदते थे और यह बड़ी मुश्किल से मिलती थी।

उन दिनों छठ करने के लिए यमुना के किनारे लोग शायद ही जाते थे। वे अपने घर की छत पर हौद में पानी डालकर छठ पूजा के दौरान सूर्य को अर्घ्य देते थे। या फिर जो लोग छठ पूजा करते थे, वे आपस में मंडली बनाकर किसी मंदिर के प्रांगण में जमीन में गड्ढा खोदकर उसमें पानी डाल देते थे और उसमें खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे। लेकिन अब यमुना किनारे बकायदा छठ के लिए घाट बनाए जाते हैं और साफ सफाई की भी विशेष व्यवस्था की जाती है।

एशियाड के बाद बदल गया ट्रेंड

एशियाड के बाद इस स्थिति में बड़ा बदलाव आया। 80 के दशक में एशियाड के कारण राजधानी दिल्ली में बड़ी संख्या में निर्माण का काम हुआ और इसके लिए भारी संख्या में मजदूरों का दिल्ली की ओर पलायन हुआ। बिहार और पूर्वांचल के मजदूर और अन्य वर्ग के लोग काम की तलाश में दिल्ली आए और एशियाड के बाद भारी संख्या में ये लोग यहीं बस गए। इसके बाद से यहां छठ पर्व मनाने वालों की संख्या हजारों से लाखों में पहुंच गई।

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