Home » Culture & Tradition of India » वसंत पंचमी की पौराणिक कथा
वसंत पंचमी की पौराणिक कथा

वसंत पंचमी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार वसंत पंचमी मां सरस्वती के आविर्भाव व विजय का दिन है।

Mahabali Kumbhkaran
Mahabali Kumbhkaran

वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि सरस्वती ने अपने चातुर्य से देवताओं को कुंभकर्ण से बचाया था। देवी वरदान प्राप्त करने के लिए राक्षसराज कुंभकर्ण ने करीब दस हजार वर्षों तक तपस्या की।

जब ब्रह्मा प्रसन्न हुए और वरदान के लिए आए तो सभी देव विचलित हो उठे। सभी ने कहा कि यह राक्षस योनि में है और वरदान प्राप्त होने के बाद उन्मत्त व संहारक हो जाएगा।

वरदान मांगते समय सरस्वती कुंभकर्ण की जिह्वा पर विराजमान हो गईं और कुंभकर्ण यह वर मांग बैठा कि ‘स्वप्न वर्षाव्यनेकानि देव देव ममाप्सिनम‘, यानी मैं कई वर्षों तक सोता रहूं, यही मेरी इच्छा है।

Check Also

How did Hanuman served Lord Rama?

How did Hanuman served Lord Rama?

Hanuman’s initial words highly impressed Rama, and made him comment: “None can talk this way …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *