Home » Poems For Kids » Poems In Hindi (page 5)

Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला देखूँ: कुमार विश्वास

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला देखूँ: कुमार विश्वास

रंग दुनिया ने दिखाया है निराला, देखूँ, है अँधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ आइना रख दे मेरे हाथ में, आख़िर मैं भी, कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखूँ, जिसके आँगन से खुले थे मेरे सारे रस्ते, उस हवेली पे भला कैसे मैं ताला देखूँ। हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है, यहाँ फरहाद के आगे …

Read More »

मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगा: कुमार विश्वास

मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगा: कुमार विश्वास

मैं तो झोंका हूँ हवा का उड़ा ले जाऊँगा, जागती रहना तुझे तुझसे चुरा ले जाऊँगा। हो के कदमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा, ख़ाक में मिल के भी मैं खुश्बू बचा ले जाऊँगा। कौन सी शै मुझको पहुँचाएगी तेरे शहर तक, ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊँगा। कोशिशें मुझको मिटाने की भले हों कामयाब, …

Read More »

प्यार जब जिस्म की चीखों में दफ़न हो जाये: कुमार विश्वास

प्यार जब जिस्म की चीखों में दफ़न हो जाये: कुमार विश्वास

प्यार जब जिस्म की चीखों में दफ़न हो जाये, ओढ़नी इस तरह उलझे कि कफ़न हो जाये। घर के एहसास जब बाजार की शर्तो में ढले, अजनबी लोग जब हमराह बन के साथ चले। लबों से आसमां तक सबकी दुआ चुक जाये, भीड़ का शोर जब कानो के पास रुक जाये। सितम की मारी हुई वक्त की इन आँखों में, …

Read More »

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है: कुमार विश्वास

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है: कुमार विश्वास

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है। मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है, ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है। मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है, कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है। यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों …

Read More »

कुछ छोटे सपनो के बदले: कुमार विश्वास

कुछ छोटे सपनो के बदले: कुमार विश्वास

कुछ छोटे सपनो के बदले, बड़ी नींद का सौदा करने, निकल पडे हैं पांव अभागे, जाने कौन डगर ठहरेंगे… वही प्यास के अनगढ़ मोती, वही धूप की सुर्ख कहानी, वही आंख में घुटकर मरती, आंसू की खुद्दार जवानी, हर मोहरे की मूक विवशता, चौसर के खाने क्या जाने, हार जीत तय करती है वे, आज कौन से घर ठहरेंगे, निकल …

Read More »

डर लगता है!: कुमार विश्वास

डर लगता है! - हताश कुमार विश्वास की निराश कविता

हर पल के गुंजन की स्वर–लय–ताल तुम्हीं थे, इतना अधिक मौन धारे हो, डर लगता है! तुम, कि नवल–गति अंतर के उल्लास–नृत्य थे, इतना अधिक हृदय मारे हो, डर लगता है! तुमको छू कर दसों दिशाएं सूरज को लेने जाती थीं, और तुम्हारी प्रतिश्रुतियों पर बांसुरियाँ विहाग गाती थीं तुम, कि हिमालय जैसे, अचल रहे जीवन भर, अब इतने पारे–पारे …

Read More »

नेह के सन्दर्भ बौने हो गए: कुमार विश्वास

नेह के सन्दर्भ बौने हो गए - कुमार विश्वास

नेह के सन्दर्भ बौने हो गए होंगे मगर, फिर भी तुम्हारे साथ मेरी भावनायें हैं, शक्ति के संकल्प बोझिल हो गये होंगे मगर, फिर भी तुम्हारे चरण मेरी कामनायें हैं, हर तरफ है भीड़ ध्वनियाँ और चेहरे हैं अनेकों, तुम अकेले भी नहीं हो, मैं अकेला भी नहीं हूँ, योजनों चल कर सहस्रों मार्ग आतंकित किये पर, जिस जगह बिछुड़े …

Read More »

एक आशीर्वाद: दुष्यंत कुमार

एक आशीर्वाद: दुष्यंत कुमार

जा तेरे स्वप्न बड़े हों। भावना की गोद से उतर कर जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें। चाँद तारों सी अप्राप्य ऊचाँइयों के लिये रूठना मचलना सीखें। हँसें मुस्कुराऐं गाऐं। हर दीये की रोशनी देखकर ललचायें उँगली जलायें। अपने पाँव पर खड़े हों। जा तेरे स्वप्न बड़े हों। ∼ दुष्यंत कुमार

Read More »

तन बचाने चले थे: रामावतार त्यागी

तन बचाने चले थे: रामावतार त्यागी

तन बचाने चले थे कि मन खो गया एक मिट्टी के पीछे रतन खो गया। घर वही, तुम वही, मैं वही, सब वही और सब कुछ है वातावरण खो गया। यह शहर पा लिया, वह शहर पा लिया गाँव का जो दिया था वचन खो गया। जो हज़ारों चमन से महकदार था क्या किसी से कहें वह सुमन खो गया। …

Read More »

शिकायत: रामावतार त्यागी

शिकायत: रामावतार त्यागी

आँसुओ तुम भी पराई आँख में रहने लगे हो अब तुम्हें मेरे नयन इतने बुरे लगने लगे हैं। बेवफाई और मेरे सामने ही यह कहाँ की दोस्ती है ? जिंदगी ताने सुनाती है कभी मुझको जवानी कोसती है। कंटको तुम भी विरोधी पाँव में रहने लगे हो अब तुम्हें मेरे चरण इतने बुरे लगने लगे हैं। साथ बचपन से रहे …

Read More »