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Poems In Hindi

बच्चों की हिन्दी कविताएं — 4to40 का हिन्दी कविताओ का संग्रह | Hindi Poems for Kids — A collection of Hindi poems for children. पढ़िए कुछ मजेदार, चुलबुली, नन्ही और बड़ी हिंदी कविताएँ. इस संग्रह में आप को बच्चो और बड़ो के लिए ढेर सारी कविताएँ मिलेंगी.

दो अनुभूतियाँ: अटल बिहारी वाजपेयी

दो अनुभूतियाँ: अटल बिहारी वाजपेयी

पहली अनुभूति: गीत नहीं गाता हूँ बेनक़ाब चेहरे हैं, दाग़ बड़े गहरे हैं टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूँ गीत नहीं गाता हूँ लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा शीशे सा शहर अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ गीत नहीं गाता हूँ पीठ मे छुरी सा चांद राहू गया रेखा फांद मुक्ति के क्षणों में बार बार बंध …

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बाल-कविताओं का संग्रह: प्रभुदयाल श्रीवास्तव

Prabhudayal Shrivastav

यजमान कंजूस‌: प्रभुदयाल श्रीवास्तव बरफी ठूंस ठूंस कर खाई। सात बार रबड़ी मंगवाई। एक भगोना पिया रायता। बीस पुड़ी का लिया जयका। चार भटों का भरता खाया। दो पत्तल चाँवल मंगवाया। जल पीने पर आई डकार। छुआ पेट को बारंबार। बोले नहीं पिलाया जूस। यह यजमान बहुत कंजूस। ~ प्रभुदयाल श्रीवास्तव

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बाल-कविताओं का संग्रह: ओमप्रकाश बजाज

ओमप्रकाश बजाज की बाल-कविताओं का संग्रह

सात बहनें: ओमप्रकाश बजाज भारत के पर्वोत्तर में 7 राज्य हैं जो ‘सात बहनें’ कहे जाते हैं। इनके नाम अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा, मिजोरम कहलाते हैं। अरुणाचल कहलाता है उगते सूर्य का पर्वत और ईटागर है इसकी राजधानी। दिसपुर है असम की राजधानी, मेघालय की राजधानी शिलांग है, कोहिमा नागालैंड की और इंफाल मणिपुर की राजधानी है। …

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कानाफूसी: राम विलास शर्मा

कानाफूसी – राम विलास शर्मा

सुना आपने? चांद बहेलिया जाल रुपहला कंधे पर ले चावल की कनकी बिखेर कर बाट जोहता रहा रात भर, किंतु न आईं नीड़ छोड़ कर रंग बिरंगी किरण बयाएं! सुना आपने? सुना आपने? फाग खेलने क्ंवारी कन्याएं पलास की केशर घुले कटोरे कर मे लिये ताकती खड़ी रह गईं, ऋतुओं का सम्राट पहन कर पीले चीवर बौद्ध हो गया! सुना …

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दीदी के धूल भरे पाँव: धर्मवीर भारती

दीदी के धूल भरे पाँव: धर्मवीर भारती

दीदी के धूल भरे पाँव बरसों के बाद आज फिर यह मन लौटा है क्यों अपने गाँव; अगहन की कोहरीली भोर: हाय कहीं अब तक क्यों दूख दूख जाती है मन की कोर! एक लाख मोती, दो लाख जवाहर वाला, यह झिलमिल करता महानगर होते ही शाम कहाँ जाने बुझ जाता है – उग आता है मन में जाने कब …

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दिवा स्वप्न: राम विलास शर्मा

दिवा स्वप्न: राम विलास शर्मा

वर्षा से धुल कर निखर उठा नीला नीला फिर हरे हरे खेतों पर छाया आसमान‚ उजली कुँआर की धूप अकेली पड़ी हार में‚ लौटे इस बेला सब अपने घर किसान। पागुर करती छाहीं में कुछ गंभीर अधखुली आँखों से बैठी गायें करती विचार‚ सूनेपन का मधु–गीत आम की डाली में‚ गाती जातीं भिन्न कर ममाखियाँँ लगातार। भर रहे मकाई ज्वार …

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धुंधली नदी में: धर्मवीर भारती

धुंधली नदी में: धर्मवीर भारती

आज मैं भी नहीं अकेला हूं शाम है‚ दर्द है‚ उदासी है। एक खामोश सांझ–तारा है दूर छूटा हुआ किनारा है इन सबों से बड़ा सहारा है। एक धुंधली अथाह नदिया है और भटकी हुई दिशा सी है। नाव को मुक्त छोड़ देने में और पतवार तोड़ देने में एक अज्ञात मोड़ लेने में क्या अजब–सी‚ निराशा–सी‚ सुख–प्रद‚ एक आधारहीनता–सी …

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कृष्ण मुक्ति: राजीव कृष्ण सक्सेना

कृष्ण मुक्ति: राजीव कृष्ण सक्सेना

कितना लम्बा था जीवन पथ, थक गए पाँव डेग भर भर कर, ढल रही साँझ अब जीवन की, सब कार्य पूर्ण जग के इस पल। जान मानस में प्रभु रूप जड़ा, यह था उत्तरदायित्व बड़ा, सच था या मात्र छलावा था, जनहित पर मैं प्रतिबद्ध अड़ा। अब मुक्ति मात्र की चाह शेष, अब तजना है यह जीव वेश, प्रतिविम्ब देह …

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देखो, टूट रहा है तारा: हरिवंश राय बच्चन

देखो, टूट रहा है तारा: हरिवंश राय बच्चन

देखो, टूट रहा है तारा। नभ के सीमाहीन पटल पर एक चमकती रेखा चलकर लुप्त शून्य में होती-बुझता एक निशा का दीप दुलारा। देखो, टूट रहा है तारा। हुआ न उडुगन में क्रंदन भी, गिरे न आँसू के दो कण भी किसके उर में आह उठेगी होगा जब लघु अंत हमारा। देखो, टूट रहा है तारा। यह परवशता या निर्ममता …

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धर्म है: गोपाल दास नीरज

धर्म है: गोपाल दास नीरज

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना उन मुश्किलों में मुस्कुराना धर्म है। जिस वक्त जीना गैर मुमकिन सा लगे उस वक्त जीना फ़र्ज है इन्सान का लाज़िम लहर के साथ है तब खेलना जब हो समुन्दर पे नशा तूफ़ान का जिस वायु का दीपक बुझना ध्येय हो उस वायु में दीपक जलाना धर्म है। हो नहीं मंज़िल कहीं जिस राह …

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