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Folktales In Hindi

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सती सावित्री: सत्यवान और सावित्री की लोक-कथा

Karwa Chauth Legend Story of Satyavan and Savitri सती सावित्री

नारद ने जब यह कहा की सत्यवान की आयु बस एक वर्ष की है तो सावित्री ने निष्ठा तथा आत्मविस्वास पूर्वक कहा – ‘जो कुछ होने को था सो हो चूका। ह्रदय तो बस एक ही बार चढ़ाया जाता है। जो ह्रदय निर्माल्य हो चूका उसे उसे लौटाया कैसे जाये? सती बस एक ही बार अपना ह्रदय अपने प्राण धन …

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मातृशक्ति – देशभक्ति को प्रेरित करता लेख

मातृशक्ति

प्रात: काल के समय सुंदर-सुंदर चिड़ियाँ चहचहाती हैं। नन्हीं-नन्हीं कलियाँ अपना हास्य मुख खोले हुए अठखेलियाँ करती हैं और छोटे-छोटे बच्चे हँसते-खेलते दिखाई देते हैं। आम की सुपुष्पित डाल में से कोयल के संगीत की मधुर ध्वनी कानों में सुन पड़ती है। विशाल वृक्ष झूम-झूमकर जगदीश को प्रणाम करते जान पड़ते हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में नवीन जीवन दिखायी पड़ता है। …

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शिलाद पत्नी दुर्गावती – वीर राजपूत नारी की लोक कथा

शिलाद पत्नी दुर्गावती

‘हम लोगों ने खुन की नदी बहा दी थी, महाराज!’ खिन्न सैनिक ने कहा। ‘पर महाराज को बहादुरशाह के क्रूर सैनिकों ने बंदी बना लिया।’ सैनिक ने सिर निचा कर लिया। ‘बहादुरशाह तो हुमायूँ का एक छोटा सरदार है’ राय ने दुर्ग की अधिपति शिलाद के छोटे भाई लक्ष्मण ने रोष के साथ उत्तर दिया। ‘यदि स्वयं हुमायूँ भी आ …

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महाराणा प्रताप की रानी – वीर राजपूत नारी की लोक कथा

महाराणा प्रताप की रानी - वीर राजपूत नारी की लोक कथा

वर्ष 1576 ई० में हल्दी घाटी का विकट युद्ध हुआ। यदि राणा चाहते तो अपने भाले की नोक से बाबर के घर का चिराग गुल कर देते, शहजादा सलीम के हाथी पर चेतक अपने अगले चरण रख चुका था। राजपूतों ने बड़ी वीरता दिखायी, मान का अभिमान विजयी हुआ। राणा के स्वामिभक्त सरदार माना ने उनकी जान बचायी। अकबर के …

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बीकानेर की वीरांगना – वीर राजपूत नारी की लोक कथा

बीकानेर की वीरांगना – वीर राजपूत नारी की लोक कथा

अपने सतीत्व और पतिव्रता – धर्म की रक्षा करना ही भारतीय स्त्रियों के जीवन का एक अनुपम और पवित्र आदर्श रहा है। उनके सतीत्व के वज्राघात से बड़े-बड़े साम्राज्यों की नींव हिल उठी, राजमुकुट धूलि में लोटने लगे, मानव – वेषधारी दानवों की दानवता और व्यभिचारमूल्क अत्याचार का अन्त हो गया। किरण देवी या राजरानी किरण देवी मेवाड़ सूर्य महाराणा …

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रूपनगढ़ की राजकुमारी – वीर राजपूत नारी की लोक कथा

रूपनगढ़ की राजकुमारी - वीर राजपूत नारी की लोक कथा

‘अपनी कन्या को शाही बेगम बनने के लिये तुरंत दिल्ली भेज दो!’ औरंगजेब के इस संदेश के साथ दिल्ली से एक सेना भी रूपनगढ़ के राजा विक्रम सोलंकी के पास पहुँची। अनेक राजपूत नरेशों ने अपनी कन्याएँ दिल्ली को भेज दी थीं। विरोध करने में केवल सर्वनाश ही था। कोई मार्ग न देखकर राजा प्रस्तुत हो गये। राजकुमारी को भी …

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श्री गणेश जी: सर्वप्रथम उनकी पूजा – आखिर क्यों!

श्री गणेश जी: सर्वप्रथम उनकी पूजा - आखिर क्यों!

‘यज्ञ, पूजन, हवनादि के समय पहले किस देवता की पूजा की जाय?’ देवताओं में ही इस प्रश्न पर मतभेद हो गया था। सभी चाहते थे कि यह सम्मान मुझे मिले। जब आपस में कोई निपटारा न हो सका, तब सब मिलकर ब्रह्माजी के पास गये; क्योकि सबके पिता – पितामह तो ब्रह्माजी ही हैं और सत्पुरुष बड़े – बूढों की …

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गणेश जन्म: हिंदी पौराणिक कथा

गणेश जन्म: हिंदी पौराणिक कथा

एक बार भगवती पार्वती स्नान कर रही थीं। उसी समय भगवन शिव वहाँ पहुँच गये। पार्वतीजी उन्हें देखकर लजा गयीं। अपनी प्रिय सखी जया – विजया के कहने पर उन्होनें अपने शरीर के मैल से एक पुरुष का निर्माण किया। वह देखने में परम सुन्दर तथा बल – पराक्रम से सम्पन्न था। पार्वती जी ने उसे नाना प्रकार के आभूषण …

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चतुर सुनार – स्वप्ना दत्त

चतुर सुनार

एक समय की बात है – एक राजा था, जिसे अपने बुद्धिमान होने का बड़ा घमंड था। उसका विशवास था कि पूरे राज्य में एक भी ऐसा नही है, जो उसे धोका देकर साफ़ निकल जाए। एक दिन यह बात उसने मंत्रियों से कही। सबने हकमी भर दी, सिवाय एक के। राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ। “क्या तुम नही मानते …

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मुक्ति का उपाय – पौराणिक ज्ञानवर्धक कथा

मुक्ति का उपाय - पौराणिक ज्ञानवर्धक कथा

पुराण भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है। पुराणों में मानव जीवन को ऊँचा उठाने वाली अनेक सरल, सरस, सुन्दर और विचित्र-विचित्र कथाएँ भरी पड़ी हैं। उन कथाओं का तात्पर्य राग-द्वेष रहित होकर अपने कर्तव्य का पालन करने और भगवान को प्राप्त करने में ही है। पद्मपुराण के भूमिखण्ड में ऐसी ही एक कथा आती है। अमरकण्टक तीर्थ में सोम शर्मा …

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