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Tag Archives: Restlessness Poems for Students

कबीर के दोहे: Couplets of Kabir Das

Famous Kabir Das Ke Dohe कबीर के दोहे

Name Kabir Das / कबीर दास Born लगभग (1398 या 1440) लहरतारा, निकट वाराणसी Died लगभग (1448 या 1518) मगहर Occupation कवि, भक्त, सूत कातकर कपड़ा बनाना Nationality भारतीय कबीरदास भारत के महानतम कवी थे, इन्होने जीवन और उसके भीतर भावनाओ को अहम् बताया और मनुष्य को मार्गदर्शन दिया। इनके काव्य में कहीं भी धर्म का विषय नहीं था, ये …

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साधो ये मुर्दों का गाँव: संत कबीर जी की हिन्दी कविता

Sant Kabir Devotional Composition साधो ये मुरदों का गाँव

Here is a famous composition of Saint Kabir Das, a nirguni saint of 15th century, who lived in Banaras. In the present composition Kabir points out how fleeting the life is. Be it a prophet, a King, divine personalities, common people, doctor and patients, all eventually die. This is indeed a world of dead people. The ultimate truth is the …

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धूम्रपान विद्यार्थियों और बच्चों के लिए कविता: क्यों मौत बुला रहे हो?

धूम्रपान पर कविता: क्यों मौत बुला रहे हो? World No Smoking Day Hindi Poem

वर्तमान में धूम्रपान की सबसे प्रचलित विधि सिगरेट है, जो मुख्य रूप से उद्योगों द्वारा निर्मित होती है किन्तु खुले तम्बाकू तथा कागज़ को हाथ से गोल करके भी बनाई जाती है। धूम्रपान के अन्य साधनों में पाइप, सिगार, हुक्का एवं बॉन्ग शामिल हैं। ऐसा बताया जाता है कि धूम्रपान से संबंधित बीमारियां सभी दीर्घकालिक धूम्रपान करने वालों में से …

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धूम्रपान है दुर्व्यसन: धूम्रपान आदत पर विद्यार्थियों और बच्चों के लिए कविता

Smoking Addiction Poem in Hindi धूम्रपान है दुर्व्यसन

धूम्रपान है दुर्व्यसन, मुँह में लगती आग स्वास्थ्य, सभ्यता, धन घटे, कर दो इसका त्याग। बीड़ी-सिगरेट पीने से, दूषित होती वायु छाती छननी सी बने, घट जाती है आयु। रात-दिन मन पर लदी, तम्बाकू की याद अन्न-पान से भी अधिक, करे धन-पैसा बरबाद। कभी फफोले भी पड़ें, चिक जाता कभी अंग छेद पड़ें पोशाक में, आग राख के संग। जलती …

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माँ की ममता: मातृ दिवस पर हिंदी कविताएँ

माँ की ममता - Mother's Day Special Hindi Bal Kavita

माँ की ममता जब मैं छोटी बच्ची थी, माँ की प्यारी दुलारी थी, माँ तो हमको दूध पिलाती, माँ भी कितनी भोली-भाली। माखन-मिश्री घोल खिलाती, बड़े मज़े से गोद में सुलाती, माँ तो कितनी अच्छी है, साड़ी दुनिया उसमें है। ∼ सुप्रीता झा

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माँ तो माँ होती है Mother’s Day Hindi Poem

माँ तो माँ होती है - ओम प्रकाश बजाज

मम्मी – अम्मी – अम्मा – माता – माम्, कुछ भी बुलाओ माँ तो माँ होती है। अपने बच्चों पर जान देती है, उनके लिए हर कष्ट सहती है। अपनी कोख से जन्म देती है, उन पर वारी – वारी जाती है। पाल पोस कर बड़ा करती है, गीले में सो कर सूखे में सुलाती है। माँ का आदर सदा …

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माँ: दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

माँ - दिल छू जाने वाली हिंदी कविता

मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ मै तुझे भूल गया उन झूठे रिश्तो के लिए जो मैंने बाहर निभाए उन झूठे नातो के लिए जो मेरे काम ना आये मै तेरा गुनेहगार हूँ माँ बॉस के कुत्ते को कई बार डॉक्टर को दिखाना पड़ा पुचकार कर उसे खुद अपना हाथ भी कटवाना पड़ा पर तेरा चश्मा न बनवा पाया तुझे दवा …

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मां, मेरी मां, प्यारी मां मम्मा: कैलाश खेर का दसविदानिया फिल्म से गीत

मां, मेरी मां, प्यारी मां मम्मा - कैलाश खेर Hindi Film Song on Mother

Dasvidaniya (दसविदानिया) is a Bollywood film released on 7 November 2008. The name of the movie is a pun on the list of ten things to be done before death made by Vinay Pathak, and is a play on the Russian phrase до свидания (do svidaniya), meaning good bye. Amar Kaul (Vinay Pathak) is a 37-year-old accounts manager at a …

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My Role: Inspirational Poem On Builders And Labour

My Role - Inspirational Poem On Builders & Labour

Labour in India refers to employment in the economy of India. In 2012, there were around 487 million workers in India, the second largest after China. Of these over 94 percent work in unincorporated, unorganized enterprises ranging from pushcart vendors to home-based diamond and gem polishing operations. The organised sector includes workers employed by the government, state-owned enterprises and private …

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भई भाषण दो: गोपाल प्रसाद व्यास – भारतीय राजनीति पर व्यंग्य पूर्ण हिंदी कविता

भई भाषण दो: गोपाल प्रसाद व्यास

यदि दर्द पेट में होता हो या नन्हा–मुन्ना रोता हो या आंखों की बीमारी हो अथवा चढ़ रही तिजारी हो तो नहीं डाक्टरों पर जाओ वैद्यों से अरे न टकराओ है सब रोगों की एक दवा भई, भाषण दो, भई, भाषण दो हर गली, सड़क, चौराहे पर भाषण की गंगा बहती है, हर समझदार नर–नारी के कानों में कहती रहती …

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