Tag Archives: Old Classic Hindi Stories

पुनर्मिलन: कहानियों के विशेषज्ञ जोहान पीटर हेबेल

पुनर्मिलन: कहानियों के विशेषज्ञ जोहान पीटर हेबेल

जोहान पीटर हेबेल (1760-1826) जर्मन लेखकों में अपनी छोटी-छोटी कहानियों के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। प्रस्तुत कहानी प्रेम की एक अखिण्डत प्यास और एक ऐसे विश्वास की कहानी है, जिसके सहारे आदमी अपनी तमाम भावी सम्भावनाओं के प्रति समर्पित हो जाता है। कोई पचास बरसों से भी पहले की बात है कि फालुन में – जो कि …

Read More »

दो बैलों की कथा: मुंशी प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानी

Munshi Premchand Classic Hindi Story दो बैलों की कथा

कथाकार मुंशी प्रेमचंद भारत के ही नहीं, दुनियाभर में विख्यात हुए और ‘कथा सम्राट‘ कहलाए। प्रेमचंद की जयंती 31 जुलाई को बड़े ही उत्‍साह से मनाई जाती  है। इस खास मौके पर उनकी कहानी ‘दो बैलों की कथा‘ पढ़कर अपनी यादें ताजा कर लीजिए… दो बैलों की कथा [1]: हीरा और मोती जानवरों में गधा सबसे ज्यादा बुद्धिमान समझा जाता …

Read More »

देवी: उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की लघुकथा

Munshi Premchand Short Hindi Story Devi देवी

देवी: प्रेमचंद की लघुकथा देवी: उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की लघुकथा – रात भीग चुकी थी। मैं बरामदे में खड़ा था। सामने अमीनुद्दौला पार्क नींद में डूबा खड़ा था। सिर्फ एक औरत एक तकियादार बेंच पर बैठी हुई थी। पार्क के बाहर सड़क के किनारे एक फ़कीर खड़ा राहगीरों को दुआयें दे रहा था – खुदा और रसूल का वास्ता… …

Read More »

पूस की रात: कथा सम्राट प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानी

Munshi Premchand's Short Hindi Story पूस की रात

पूस की रात: कथा सम्राट प्रेमचंद की लोकप्रिय कहानी – कथा सम्राट प्रेमचंद (31 जुलाई 1880 लमही, उत्तर प्रदेश, भारत – 8 अक्टूबर 1936 वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत) ने हिन्‍दी के खजाने में कई अनमोल रत्‍न जोड़े हैं। महज आठ साल की उम्र में प्रेमचंद की मां का स्वर्गवास होने और पिता द्वारा दूसरी शादी करने के चलते उनके बाल …

Read More »

वीर राजा की कहानी जो गणित से हार गया: गणित का डर

वीर राजा की कहानी जो गणित से हार गया: गणित का डर

बहुत समय पहले की बात है बुद्धीनगर नाम के राज्य में एक राजा रहा करता था। राज्य के नाम के अनुसार ही वहाँ पर रहने वाले सब बड़े बुद्धिमान थे और किसी भी मुसीबत का हल चुटकियों में निकाल लेते थे। पर बुद्धीनगर का राजा, जिसका नाम तो था वीरसेन, बड़ा डरपोक था। वह अपने नाम के बिलकुल उल्टा था। …

Read More »

शिक्षाप्रद हिंदी बाल-कहानी: बुद्धिमान बंजारा

Munshi Premchand Classic Hindi Story दो बैलों की कथा

एक बंजारा था। वह बैलों पर मेट (मुल्तानी मिट्टी) लादकर दिल्ली की तरफ आ रहा था। रास्ते में कई गांवों से गुजरते समय उसकी बहुत-सी मेट बिक गई। बैलों की पीठ पर लदे बोरे आधे तो खाली हो गए और आधे भरे रह गए। अब वे बैलों की पीठ पर टिके कैसे? क्योंकि भार एक तरफ हो गया। नौकरों ने …

Read More »

सआदत हसन मंटो की विवादास्पद कहानी: खोल दो

सआदत हसन मंटो की विवादास्पद कहानी: खोल दो

अमृतसर से स्पेशल ट्रेन दोपहर दो बजे चली और आठ घंटों के बाद मुगलपुरा पहुंची। रास्ते में कई आदमी मारे गए। अनेक जख्मी हुए और कुछ इधर-उधर भटक गए। सुबह दस बजे कैंप की ठंडी जमीन पर जब सिराजुद्दीन ने आंखें खोलीं और अपने चारों तरफ मर्दों, औरतों और बच्चों का एक उमड़ता समुद्र देखा तो उसकी सोचने-समझने की शक्तियां …

Read More »

सआदत हसन मंटो की लोकप्रिय कहानी हिंदी में: लाइसेंस

लाइसेंस - सआदत हसन मंटो

अब्बू कोचवान बड़ा छैल-छबीला था। उसका तांगा-घोड़ा भी शहर में नंबर वन था। वह कभी मामूली सवारी नहीं बिठाता था। उसके लगे-बंधे गाहक थे, जिनसे उसको रोजाना 10-15 रुपए वसूल हो जाते थे, जो उसके लिए काफ़ी थे। दूसरे कोचवानों की तरह उसे नशा-पानी की आदत नहीं थी, लेकिन साफ़-सुथरे कपड़े पहनने और हर वक़्त बांका बने रहने का उसे …

Read More »

बड़े घर की बेटी: ग्रामीण घर गृहस्थी पर मुंशी प्रेमचंद की अमर कहानी

Munshi Premchand Short Story Bade Ghar Ki Beti in Hindi बड़े घर की बेटी

बड़े घर की बेटी मुंशी प्रेमचंद जी द्वारा लिखित प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी में उन्होंने संयुक्त परिवार में उत्पन्न होने वाली समस्याओं, कलहों, बात का बतंगड़ बन जाने और फिर आपसी समझदारी से बिगड़ती परिस्थिति को सामान्य करने का हुनर को दर्शाया है। बड़े घर की बेटी में कहानीकार ने पारिवारिक मनोविज्ञान को बड़ी ही सूक्ष्मता से बेनीमाधव सिंह, …

Read More »

रबीन्द्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कहानियों में से एक: गूंगी

रबीन्द्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कहानियों में से एक: गूंगी

टैगोर के १५० वें जन्मदिन के अवसर पर उनके कार्यों का एक (कालनुक्रोमिक रबीन्द्र रचनाबली) नामक एक संकलन वर्तमान में बंगाली कालानुक्रमिक क्रम में प्रकाशित किया गया है। इसमें प्रत्येक कार्य के सभी संस्करण शामिल हैं और लगभग अस्सी संस्करण है। २०११ में, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने विश्व-भारती विश्वविद्यालय के साथ अंग्रेजी में उपलब्ध टैगोर के कार्यों की सबसे बड़ी …

Read More »